रुहेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी पाने के मामले में बारादरी थाने की पुलिस जांच के लिए विश्वविद्यालय पहुंची। यहां पता चला कि अभ्यर्थी श्वेता ने बीए में नंबर कम होने पर जालसाजी करते हुए अंक बढ़ाए और बीएड में फेल होने के बावजूद पास होने की मार्कशीट बनवायी। इसी की मदद से सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी भी हासिल की।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वेरिफिकेशन के दौरान सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी पाने वाली श्वेता की मार्कशीट फर्जी पाई गई है। मंगलवार को बारादरी थाने की पुलिस जांच के लिए विश्वविद्यालय पहुंची। यहां नामांकन नंबर, मार्कशीट आदि के बारे में पूछताछ पर पता चला कि श्वेता बीए में थर्ड डिवीजन पास हुई थी। नौकरी पाने के लिए उसने नंबर बढ़वाकर गलत ढंग से फर्स्ट डिवीजन की मार्कशीट बनवा ली। इसी तरह बीएड में फेल होने पर भी श्वेता ने फर्स्ट डिवीजन की मार्कशीट बनवायी। सूत्रों की मानें तो इसमें विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। पुलिस अभी विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।
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अब तक किसी भी मामले में नहीं हुई जांच
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कई बार फर्जी मार्कशीट का मामला पकड़ा जा चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय ने कभी जांच नहीं कराई। इसलिए, विश्वविद्यालय के कर्मचारी लगातार ऐसे कामों को अंजाम दे रहे हैं।