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त्रिशूल एयरबेस पर लापरवाही की गूंज शासन तक

Sat, 23 Jan 2016 01:35 AM IST
बरेली
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बरेली। पठान कोट एयरबेस में आतंकी हमले के बाद त्रिशूल की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही ढिलाई की गूंज शासन स्तर पर पहुंच गई है। इस मामले में शासन ने खुफिया एजेंसी, प्रशासनिक और पुलिस तीनों स्तर से हालत का ब्योरा तलब किया है। शासन ने जानना चाहा है कि त्रिशूल की सुरक्षा के लिए बाहर कैसे इंतजाम हैं। वायु सेना को जरूरत के अनुसार सिविल पुलिस, नगर निगम, बीडीए तथा अन्य विभागों की ओर से सुरक्षा को पूरी मदद दिलाई जाए। शासन ने अवैध निर्माण और वहां के मकानों पर टैक्स लगाने के बाबत जिम्मेदार विभागों से भी सवाल किए हैं।  
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नगर निगम से सवाल
 कैसे ले लिया हाउस -वाटर टैक्स
कमिश्नर प्रमांशु कुमार को बैठक के दौरान पता चला कि नगर निगम ने तो त्रिशूल के चारों ओर बने अवैध मकानों पर हाउस और वाटर टैक्स लगा दिया है। उनमें से काफी लोगों ने टैक्स जमा भी कर दिए हैं, ऐसे लोगों की संख्या पहले 32 बताई गई थी लेकिन एक सौ से अधिक हैं। इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं। अंदरखाने यह भी पता चला है कि त्रिशूल के आसपास रहने वालों ने नगर निगम के टैक्स विभाग से मिलीभगत करके टैक्स लगवा लिया। क्योंकि  उनके अवैध मकानों को ध्वस्त करने का नंबर आए तो वह अपना मजबूत तर्क कोर्ट से स्थगनादेश ला सकें।
नगर निगम के टैक्स विभाग और अवैध कब्जे वालों की यह जानकारी कमिश्नर तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को हो गई है। इस बारे में केंद्रीय और प्रदेश की खुफिया एजेंसी ने भी रिपोर्ट दी है, जिसमें यह तर्क तक दिया है कि सामान्य तौर पर बड़े मकानों पर वाटर और हाउस टैक्स नहीं लगता है लेकिन यहां पर एक या दो छोटे कमरे वाले मकानों तक पर टैक्स लगा दिया है।
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बीडीए से सवाल
कैसे बन गए भवन
खुफिया रिपोर्ट में त्रिशूल के आसपास के तीन से चार मानचित्र बीडीए से पास होने की जानकारी मिली है। जिनमें बैनामा भी नहीं बताए जा रहे हैं। शपथपत्र के आधार पर मालिकाना हक और हाउस टैक्स की रसीद के आधार पर मानचित्र पास कर दिए हैं। इस खुफिया रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जा रहा है, बीडीए से ब्योरा मांगा जाएगा। जिससे कि पता चल सके कि इन मकानों के नक्शे कैसे पास किए गए। इसके अलावा कमिश्नर इस बात से खफा है कि बीडीए क्या देखता रहा, यहां पर लोगों ने बिना नक्शे के मकान बनवा लिए। जब ये लोग मकान बनवा रहे है थे तो उस समय बीडीए ने क्या कार्रवाई की। यदि कार्रवाई की तो उसके अभिलेख कहा हैं। त्रिशूल के आसपास मकान बनने के दौरान कौन-कौन जेई, एई तथा अन्य अधिकारी कौन कौन थे।
 
कमिश्नर ने की फिर बैठक
बरेली। कमिश्नर प्रमांशु कुमार की बैठक के दो दिन बाद भी बीडीए और नगर निगम की ओर से लापरवाही बरती गई तो फिर से गुरुवार को कमिश्नर ने सभी विभागों के पेच कसते हुए सर्वे पूरा कराने की समय सीमा 10 फरवरी तय कर दी है। इसी दौरान बीडीए और नगर के  साथ अवैध कब्जे करने वालों की मिलीभगत के परत दर परत गड़बड़ी के साक्ष्य मिलते जा रहे हैं।

फाइल निकालने में बीता पहला दिन  
कमिश्नर के आदेश पर त्रिशूल परिसर के आसपास जांच के लिए नगर निगम, बीडीए और तहसील स्टाफ का शुक्रवार का दिन फाइलें और नक्शे तलाशने में बीता। तहसील में त्रिशूल के आसपास के दो लेखपाल रिकार्ड रूम से 1965 से लेकर अब तक के अभिलेख निकालने में लगे रहे। कुछ अभिलेख कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम से भी निकालने के लिए बस्ते खोले गए। तहसीलदार सदर ने निगम और बीडीए के अफसरों से इस बारे में जानकारी चाही तो इन दोनों विभागों के अधिकारियों ने बताया कि आज का पूरा दिन रिकार्ड खंगालने में बीत गया। शनिवार और रविवार का दिन भी रिकार्ड निकलकर प्रश्नावली तैयार करने में बीतेगा। सोमवार से ही सर्वे की शुरुआत हो सकेगी।

गणतंत्र दिवस पर कड़े सुरक्षा इंतजाम होंगे
सेना के यूबी एरिया और वायु सेना के त्रिशूल परिसर के बाहर खुफिया रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सेना और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग के इंतजाम किए गए हैं, जो कि रात में पेट्रोलिंग और दिन में खुफिया नजरें रहेंगी।
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