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तौफीक पंखिया की गिरफ्तारी का प्रतिशोध हैं ताबड़तोड़ डकैतियां!

Wed, 27 Sep 2017 02:20 AM IST
बरेली।
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डाका के बाद दहश्‍ातजदा लाोग
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फतेहगंज पूर्वी में रामगंगा की कटरी में बसा एक गांव है पंखा खेड़ा, जहां सिर्फ पंखिया जनजाति के लोग रहते हैं। जरायम पेशा मानी जानी वाली इस जनजाति के सरगना तौफीक को कुछ दिनों पहले फतेहगंज पूर्वी पुलिस ने टिसुआ के पास गिरफ्तार कर लिया था। माना जा रहा है कि यही गिरफ्तारी अब पुलिस का सिरदर्द बनी हुई है। तौफीक की गिरफ्तारी के एक हफ्ते बाद से ही शुरू हुआ ताबड़तोड़ डकैतियाें का सिलसिला थमने में नहीं आ रहा। पुलिस के कुछ अधिकारी इन वारदातों को दबी जबान से तौफीक की गिरफ्तारी का बदला करार दे रहे हैं, लेकिन छह वारदातों के बाद भी चूंकि पुलिस कोई ठोस सुराग हासिल कर पाई है, इसलिए पुलिस के इस अनुमान की पुष्टि भी नहीं हो पा रही है।
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पंखा खेड़ा गांव की आबादी करीब एक हजार है जिनमें महिलाओं और बच्चों के अलावा पुरुषों की संख्या तीन सौ के आसपास है। डकैती लूट जैसी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में माहिर मानी जाने वाली इस जनजाति के लोग पूरे देश में वारदातें करते हैं और जब पुलिस उनके पीछे पड़ती है तो पंखा खेड़ा ही उनकी पनाहगाह बनता है। कटरी के इस गांव में पुलिस कभी नहीं पहुंच पाती। पुलिस सूत्रों की मानें तो पंखियों का सरगना तौफीक बड़ी वारदातों का तानाबाना तो बुनता है लेकिन कभी वारदातों में खुद नहीं शामिल होता। वह अपने जिले में कोई वारदात करने से भी बचता है, लिहाजा कम से कम बरेली की पुलिस के लिए पंखिया गिरोह कभी सिरदर्द नहीं रहा। मगर सात सितंबर को फतेहगंज पूर्वी पुलिस गांव टिसुआ के पास से तौफीक और उसके भाई आरिफ उर्फ मजनू को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। 

सूत्रों के मुताबिक तौफीक की गिरफ्तारी भी बेहद नाटकीय ढंग से हुई। राजस्थान में करीब 25 लाख रुपये की एक डकैती के साथ गढ़ मुक्तेश्वर और हरियाणा में हुई कुछ वारदातों में पुलिस को आरिफ उर्फ मजनू की पुलिस को तलाश थी जो तौफीक का सगा भाई है। बताया जाता है कि जब पुलिस आरिफ को नहीं पकड़ सकी तो तौफीक के जरिये ही उसने मजनू को कब्जे में ले लिया, लेकिन अधिकारियों ने दबाव बनाया तो पुलिस को तौफीक को भी गिरफ्तार दिखाना पड़ा। सूत्र तो यहां तक कहते हैं कि पुलिस अधिकारी चाहते थे कि तौफीक का एनकाउंटर कर दिया जाए लेकिन पुलिस के हाथ खडे़ कर देने के बाद दोनों को मुठभेड़ में गिरफ्तार दिखाकर जेल भेज दिया गया। 
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पंखियों के सरगना तौफीक की गिरफ्तारी के बाद ताबडतोड़ डकैतियों पूूूूरा जिला हिल गया है। वारदातें भी इस अंदाज में हो रही हैं कि पुलिस को जबर्दस्त किरकिरी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ अधिकारी अनाधिकारिक रूप से मान रहे हैं कि इन वारदातों के पीछे तौफीक की गिरफ्तारी का प्रतिशोध हो सकता है। यह संभव है कि तौफीक के साथी जिले में लगातार वारदातें करके पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हों। अफसरों की इस आशंका की हालांकि कोई पुष्टि नहीं हो पाई है लेकिन फिलहाल पुलिस बैक फुट तो है ही।
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खुद वारदात नहीं करता तौफीक, सियासत में दिलचस्पी
पंखियों का सरगना तौफीक वारदातें कराता तो है लेकिन खुद किसी वारदात में शामिल नहीं होता। हर वारदात में उसे मोटा हिस्सा मिलता है। उसने अकूत संपत्ति जुटा ली है। कुछ साल पहले उसने राजनीति की ओर कदम बढ़ा दिए। पिछले पंचायती चुनाव में उसने नगरिया कलां गांव से अपनी पत्नी नगीना बेगम को प्रधान पद का चुनाव लड़ाया जिसमें नगीना जीत गई। इस जीत से उत्साहित होकर तौफीक ने पत्नी को जिला पंचायत सदस्य पद का भी चुनाव लड़ाया लेकिन यह चुनाव वह नहीं जीत पाई। सूत्र बताते हैं कि अच्छा खासा पैसा होने के कारण वह पुलिस में भी अपनी पैठ बनाकर रखता है, इसका लाभ भी उसे मिलता आया है, लेकिन पुलिस सात सितंबर को तब गिरफ्तार कर लिया जब वह अपने भाई को सुपुर्द करने आया था।
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तौफिक को गिरफ्तार हुए दो महीने हो चुके हैं। अगर ऐसा होना होता तो कुछ समय बाद ही प्रतिक्रिया नजर आनी चाहिए थी, इसलिए ऐसा नहीं लगता है। अगर ऐसा है भी बरेली पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। बाहर के गिरोह नहीं लग रहे, क्यों कि कुछ वारदात के बाद वह जिले छोड़ देते, लेकिन यह स्थानीय है, जो लगातार वारदात कर रहे हैं।  
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- ब्रज राज मीना, एडीजी 
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