The voices were roaming around the neck
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
उस दिन मैं कमरे में अकेली थी। पति तौफीक आए। उनके साथ बहनोई भी थे। कुछ कहने से पहले ही मुझे दबोच लिया गया। मुंह को हाथ से दबा कर आवाज घोंट दी गई। कुछ देर में मुझे जिंदगी भर का दर्द दे दिया गया। अपनी अस्मत बचाने की हर कोशिश पर मुझे पीट दिया गया। मैं संघर्ष करती रही तो अचानक बहनोई ने तमंचा निकालकर धमकी दी कि आवाज उठाई तो जिंदगी खत्म कर दी जाएगी। मैं डर गई। बाद में सास से अपना दर्द बयां किया तो उन्होंने परिवार की इज्जत का वास्ता देकर मामला दबाने के लिए कहा। यह आपबीती थी महिला थाने में मौजूद आत्मदाह की कोशिश करने वाली पीड़िता की। पुलिस के सामने उसने अपना दर्द खुलकर कहा।
पीड़िता के मुताबिक जब पिता को प्रताड़ना और सामूहिक दुष्कर्म की बात बताई तो उन्होंने ससुरालियों से विरोध किया। पीड़िता ने बताया कि उसकी पिटाई करने के बाद सादे कागज पर दस्ताखत लेकर तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया गया। बेघर होने के बाद पीड़िता ने इंसाफ के लिए पति और ससुरालियों पर केस दर्ज करवाने के लिए वह सीबीगंज और भमोरा थाने के बीच भटकती रही। थानों पर जाती थी कि पुलिसकर्मियों ने क्षेत्र विवाद में मामला फंसा दिया। अधिकारियों के कार्यालय में पीड़िता की शिकायत फाइलोें के बीच दबकर रह गई। पति के खिलाफ कभी कार्रवाई नहीं हो सकी।
माचिस लाना ही भूल गई
शुक्रवार सुबह नौ बजे पीड़िता मिट्टी का तेल लेकर कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंची। खुद पर मिट्टी का तेल उड़ेलकर माचिस तलाशने लगी। पीड़िता के अनुसार जल्दबाजी में माचिस लाना ही भूल गई थी। इसी बीच पुलिस ने पीड़िता को काबू कर लिया।
मेरे पास आती, ऐसा करने की क्या जरूरत थी
डीएम पिंकी जोवल से पीड़िता की मुलाकात करवाई गई। आत्मदाह के कदम से नाराज डीएम ने पीड़िता से कहा कि कोई नहीं सुन रहा था तो मेरे पास आती। दो घंटे सबकी शिकायतों पर संज्ञान होता है। फिर उन्होंने प्यार से समझाते हुए कहा कि तुम्हारी समस्या का निस्तारण होगा। पुलिसकर्मियों को बुलाकर तत्काल एफआईआर के निर्देश जारी कर दिए।