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एक मजबूत लड़की की हिम्मत तोड़ दी शोहदों ने

Sat, 02 Apr 2016 01:28 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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27 साल की एक पैर से विकलांग लड़की अपने तीन भाई बहनों की संरक्षक भी है। मां के दूसरी शादी करने के बाद भाई - बहनों की जिम्मेदारी निभाने के लिए 6 साल से एक दुकान पर काम करती है। सामान्य जिंदगी की खुशियां जिसके हिस्से कभी नहीं आयी। एक लड़की जिसे जिम्मेदारियों ने मजबूत और हिम्मती बनाया था, बृहस्पतिवार देर रात हुई घटना से बुरी तरह टूटी हुई है। उसके साथ जो भी गुजरा उससे बेहद डरी हुई है। शायद इसी घबराहट के मारे उल्टियां कर रही है दोबारा हिम्मत बटोरकर जीना ही उसे पहाड़ सा लग रहा है। 
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बृहस्पतिवार देर रात चार शोहदों से जान बचाने को लिए तीन घंटे के संघर्ष को याद करते ही वह सिहर जाती है। युवती ने बताया कि वह रोज की तरह साढ़े नौ बजे दुकान से काम खत्म कर निकली। उसे  एकता नगर में रहने वाली रिश्ते की बहन के घर जाना था, उसने कॉल करके भाई को लेने आने का कह दिया था। हर दिन चहल पहल वाला रास्ता  क्रिकेट मैच और बृहस्पतिवार के साप्ताहिक अवकाश के कारण कुछ सुनसान सा था। वह पैदल एकता नगर की ओर बढ़ने लगी तभी एक किनारे एक बाइक और कार खड़ी दिखी। बाइक के पास चार लड़के शराब पीकर खड़े मजाक कर रहे थे। उसे आता देख गंदे गाने गाते हुए उससे घेरकर हरकतें करने लगे। गोली नाम के लड़के ने उसे कार में खींचने की कोशिश की।  चार वहशियों से घिरी लड़की किसी तरह उनकी पकड़ से भागी, गिरते पड़ते पास की एक कालोनी में जाकर छुप गई। लड़की ने बताया कि चारों इधर-उधर उसे ढूंढते रहे। गालियां देते हुए कह रहे थे आज रात इस लड़की को नहीं छोड़ेंगे । लड़के साढ़े ग्यारह तक बजे तक उसका पीछा करते रहे। उसने कई मकानों के गेट के पीछे खुद को छुपाने की कोशिश की। लड़की के अनुसार, करीब डेढ़ घंटे के बाद वह पास की कालोनी से निकलकर स्टेडियम रोड के शिव मंदिर की ओर बढ़ी, उसके बाद चारखंभा चौराहा होते हुए गलियों-गलियों गुजरती हुई रात पौने दो बजे संजयनगर में अपने घर पहुंची।  
 
बेहद जिम्मेदार और ईमानदार है युवती 
सालों पहले पिता की मौत के बाद मां ने दूसरे व्यक्ति का हाथ थाम लिया और अपने तीन छोटे भाई बहनों की जिंदगी थामने की जिम्मेदारी इस लड़की के जिम्मे हो गई। छोटी उम्र तक नानी और मामा सहारा रहे, फिर सबका परिवार बड़ा और उसे किराए के मकान में दो छोटी बहन और भाई संग रहना पड़ा। इस दौरान उसने एक बहन और भाई की शादी भी कर दी। छह साल से वह अपनी ईमानदारी के बूते एक दुकान पर काम कर रही है। 
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व्हाट्सएप कॉल से पता लगा खतरे में है बहन
बहन को लेने एकता नगर से सिलेक्शन प्वाइंट चौराहे की ओर पैदल आ रहे रिश्ते के भाई को तब उसके खतरे में होने की जानकारी मिली, जब उसके नंबर पर बहन का व्हाट्सएप कॉल आया। लड़की ने बताया कि जैसे ही उसने सड़क पर लड़कों को देखा वह रुककर अपने भाई को फोन मिलाने लगी। लड़के करीब आ गए और उससे फोन छीन लिया। शोहदे ने उसका फर्स भी छीन लिया जिसमें एक और फोन भी था। लड़की के भाई ने बताया कि उसे फोन पर दीदी के चीखने और रोने की आवाजें आ रही है। जिससे वह डर गया। उसके बाद उसने फोन मिलाया पर वह स्विच्ड ऑफ जा रहा था।

संवेदहीन, निकम्मी पुलिस का चेहरा फिर सामने आया
महिला अपराध को रोकने के लिए शासन ने एक छत के नीचे न्याय दिलाने के लिए आशा ज्योति केंद्र स्थापित करा दिया है लेकिन पुलिस की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है। बृहस्पतिवार की रात लेकिन सलेक्शन प्वाइंट स्थित एक दुकान पर काम करने वाली लड़की के अपहरण की सूचना के बाद भी प्रेमनगर और बारादरी थाने की पुलिस गंभीर नहीं हुई। दोनों ही थानों की पुलिस एक दूसरे के क्षेत्र का मामला बताकर टालमटोल करती रही।  बारादरी क्षेत्र में गश्त कर रही पुलिस जीप ने पीड़ित परिवार को रात भर अपने स्तर से खोजबीन कर अगले दिन सुबह आकर फोन ट्रेसिंग पर लगवाने की बात कही।
 लड़की का मोबाइल बंद हो गया तो दुकान मालिक ने उसके अपहरण की आशंका जताई और पहले सलेक्शन प्वाइंट बूथ पर पहुंचकर सूचना दी, लेकिन यहां तैनात पुलिस कर्मी क्रिकेट मैच देखने में लगे हुए थे। उन्होंने पीड़ित परिवार को प्रेमनगर थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराने को कहा।
सिपाही के कहने से पीड़ित परिवार प्रेमनगर थाने पहुंचा तो उन्हें मामला बारादरी क्षेत्र का होना बताकर टरका दिया गया। जब दुकानदार और पीड़ित परिवार बारादरी थाने पहुंचे तो यहां घटना स्थल प्रेमनगर का तर्क देकर वापस कर दिया। परिवार फिर से  प्रेमनगर थाने पहुंचा तो उनको हड़का दिया गया। वहां मौजूद पुलिस वालों का रुख देखकर वे चुपचाप थाने से वापस लौट लिए और अपने स्तर से खोजबीन करते रहे। आखिरकार रात पौने दो बजे खुद ही भटकते हुए अपने घर पहुंची। यह जानकारी रात में ही पुलिस को दी तो वहां मौजूद पुलिस वालों ने पीड़ित परिवार से यह लिखवा लिया कि वह अब इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं।

इंस्पेक्टर ऐसे बोलते हैं
इस घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला बयान रहा इंस्पेक्टर प्रेमनगर देवेश सिंह का। सुबह उन्हें अमर उजाला से इस लड़की के बारे में पूछा गया कि उसके साथ क्या हुआ तो जवाब मिला- चली गई होगी किसी के साथ। रात में भी जब उनसे यही सवाल किया गया था तब भी उनका जवाब ऐसा ही था।

लड़की के लापता होने की सूचना को संजीदगी से लिया गया था। सीओ सिटी ने स्वयं ही पुलिस के साथ उसकी रात में ही तलाश की थी। तुरंत उसके मोबाइल को सर्विलांस पर लगाकर लोकेशन भी जानी गई थी। इसके बाद पौने दो बजे लड़की घर पहुंच गई और दुकानदार ने शुक्रवार सुबह लिखित तहरीर देने की बात कही थी, लेकिन कोई नहीं है। चूंकि लड़की बालिग है, अगर वह जो भी लिखित रूप से देगी तो उसके आधार कार्रवाई की जाएगी।
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- समीर सौरभ, प्रभारी एसएसपी
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