थाना इज्जतनगर की 474, न्यू मॉडल रेलवे कॉलोनी में रहने वाले रेलवे के एसी मैकेनिक मोहित कुमार श्रीवास्तव ने जालसाजों का नेटवर्क बनाकर गरीबों को सुनहरे सपने दिखाए और 50 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद जालसाजी करने के आरोपी एसपी मैकेनिक को थाने बुलाकर जेल भेज दिया। उसकी पत्नी समेत चार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
मोहल्ला सुभाषनगर में रामअवतार हलवाई के प्रतिष्ठान के पास रहने वाले विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दो साल पहले अर्चना श्रीवास्तव ने अपने पति मोहित कुमार श्रीवास्तव के साथ मिलकर रियल तुलसी एग्रो इंडिया कंपनी का पंजीकरण कराया। कंपनी का मुख्य कार्यालय उन्होंने ई-एकता नगर डीडीपुरम में खोला। इसमें बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी दी गई। कंपनी में थाना शाही के चकदाह गांव निवासी (मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले) हेमलाल राय उर्फ विजय राय, नन्हें खां निवासी कर्मपुर चौधरी गांव को डायरेक्टर और थाना भोजीपुरा के धौरा टांडा निवासी सुभाष विश्वास को चेयरमैन बनाया गया। इन लोगों ने कमीशन एजेंट बनाकर गरीबों को सुनहरे सपने दिखाकर 50 लाख रुपये जमा करा लिए। एक और दो वर्षीय योजनाएं पूरी होने पर निवेशकों ने रुपये मांगे तो मोहित अग्रवाल और उनकी पत्नी ने कंपनी बंद कर दी। वह निवेशकों को लेकर 27 दिसंबर 2014 को इज्जतनगर थाने पहुंचे तो पुलिस ने टरका दिया। इस पर पीड़ित ने मामले में कोर्ट के आदेश पर पांचों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। एसपी सिटी समीर सौरभ ने बताया कि ठगी करने वाले बाकी लोगों की तलाश की जा रही है। उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह थी योजनाएं
रेल कर्मी मोहित और उनके गैंग ने जालसाजी करने के लिए कंपनी की प्रचार सामग्री, पम्फलेट, बुकलेट, पासबुक, प्राप्ति रसीदें छपवा रखी थीं। कंपनी ने 12 महीने, 24 महीने, 36 महीने, 60 महीने और 96 महीने की फिक्सड डिपोजिट योजना चला रखीं थीं। इन योजनाओं में 100, 200, 300, 400, 500 और 1000 हजार रुपये प्रतिमाह जमा किए गए। निवेशकों को प्रेरित करने के लिए एजेंटों को मोटी रकम दी जा रही थी।
इस तरह बिगड़ा खेल
-16 मार्च 2012 को 200 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 28 फरवरी 2014 तक नितिन कुमार, माला देवी, सुनीता, संजय श्रीवास्तव, लक्ष्मी, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, संगीता वर्मा, गौरव, अनीता, पूजा, रजी अहमद खान, पूनम श्रीवास्तव ने विभिन्न मासिक जमा योजनाओं में निवेशकों ने चार लाख रुपये जमा किए थे। एक और दो वर्षीय योजनाओं का समय पूरा होने पर रुपये मांगे तो रेल कर्मी मोहित और उनकी पत्नी अर्चना ने रुपये देने से इनकार कर दिया।