सैंजना में तीन लड़कियों और राजू की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए शनिवार से मजिस्ट्रेटी जांच शुरु हो जाएगी। एसडीएम मीरगंज पारसनाथ मौर्य ने सार्वजनिक अभिसूचना जारी करके आम आदमी से साक्ष्य मांगे हैं। लोगों से कहा है कि जिसको जो भी जानकारी हो वह गोपनीय या फिर लिखित में दे सकता है। इसी दौरान पीड़ित परिवार से बयान लिए जाएंगे।
एसओ मीरगंज सत्येंद्र यादव का कहना है कि राजू की मौत का रहस्य वह भी अब तक नहीं समझ पाए हैं। शुक्रवार को सैंजना जाकर गांव वालों से पता लगाने की कोशिश की। एसओ के अनुसार वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही भगवान मानकर मामले की जांच कर रहे हैं और इस आधार पर राजू की मौत जहर खाने से हुई। राजू की मौत का रहस्य तीन से चार घरों के बीच में है। वहीं से सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। 27 अगस्त की रात को सोमपाल राजू के साथ दिल्ली से आकर सैंजना में प्रधान मोहम्मद यूसुफ के भाई मोहम्मद नबी के घर रुके। राजू की मुंह बोली मां त्रिवेणी देवी उर्फ सरोज के अलावा पत्नी शकुंतला भी वहीं थी।
जहर आया कहां से?
सोमपाल का कहना है कि राजू सुबह तीन से पांच बजे के बीच प्रधान के घर से उठकर बाहर गया। पहले उसके पास जहर नहीं था तो इतने सबेरे उसके पास जहर कहां से आया, रात को कौन सी दुकान में जहर बिक रहा था? सुबह 10 बजे से पहले कोई दुकान भी नहीं खुलती। अगर राजू की मौत जहर खाने से भी हुई तो उसने जहर खुद खाया या किसी ने जबरदस्ती खिलाया। अगर जहर राजू ने खुद भी खाया तो उसे बाजार से लाकर किसने दिया। ये रहस्य तो राजू का साथी सोमपाल या फिर प्रधान मोहम्मद यूसुफ ही खोल सकते हैं। तीनों लड़कियों कीमौत की कहानी भी यहीं से घूम सकती है। सोमपाल राजू के सारे राज जानता था और लड़कियों को भी।
डूबकर मौत का मतलब आत्महत्या तो नहीं होता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस का तर्क नहीं समझ पा रहे चिकित्सक
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सैंजना गांव में तीन बहनों की मौत की वजह पानी में डूबना बताया गया है।सामूहिक आत्महत्या का न तो कारण स्पष्ट है और न ही कोई सबूत । भले ही डीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिये हों लेकिन पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर इसे आत्महत्या साबित करने में जुटी हई है।
अमर उजाला ने पोस्टमार्टम पर शहर के चिकित्सकों से बातचीत की तो सभी उन्हाेंने भी कोई ठोस सबूत न मिलने तक इसे आत्महत्या मानने से इंकार किया है। डॉक्टराें का कहना है कि इससे आत्महत्या सिद्ध नहीं होती। तीन लोगों की परिस्थितियों और उम्र में फर्क है। आज तक मेडिकल साइंस में भी ऐसा कोई उदाहरण सामने नहीं आया।
कौमार्य भंग नहीं था लड़कियों का
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिंकी और प्रीति की हाईमन इंटैक्ट यानी कौमार्य सुरक्षित पाया गया है।यानी नतो कभी उनके किसी पुरुष से संबंध बने और न ही उनके साथ हत्या से पहले रेप हुआ। शारदा की रिपोर्ट में उसके कौमार्य के बारे में कुछ नहीं लिखा है लेकिन यह भी नहीं है कि उसके साथ रेप हुआ या उसके किसी से पहले से संबंध थे। ऐसे में शारदा अगर किसी कारण से आत्महत्या करती है तो प्रीति और पिंकी क्याें इसमें शामिल होगी। रिपोर्ट में उनके फेफड़े में बालू और पानी पाया गया है। यह न तो आत्महत्या साबित करता है और न ही हत्या।
मनोवैज्ञानिक तर्क भी पुलिस से जुदा
बरेली कालेज में मनोविज्ञान विभाग की डॉ. हेमा खन्ना का कहना है कि आत्महत्या का कोई साफ कारण होना चाहिए जो नहीं दिख रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता रही है कि उनके शरीर के अंदर और बाहर कोई चोट नहीं है। ऐसे में अलग- अलग उम्र की लड़कियां एक साथ क्याें आत्महत्या करेंगी। कोई ऐसी घटना जो शर्मसार करने वाली हो उसमें एक बड़ी उम्र की लड़की की मानसिक स्थिति अलग हो सकती है और छोटी उम्र की लड़कियों में अलग। बहुत जांच का विषय है। संभावना है कि ऑनर किलिंग हो या फिर उन्हें जबरदस्ती नदी में धकेला गया हो।