बरेली/शीशगढ़। दिल्ली में बंधक बनाकर ग्यारह लोगों पर सामूहिक दुराचार का आरोप लगाने वाली लड़की के परिवार वालों ने केस बनाने के लिए कई झूठ भी बोले हैं। उनका पहला झूठ तो लड़की की उम्र को लेकर ही पकड़ा गया। परिवार वाले उसे सोलह साल की नाबालिग बता रहे थे। जबकि मेडिकल परीक्षण के दौरान लड़की की उम्र 25 साल निकली। विवेचक ने बताया कि फिलहाल नामजद आरोपियों से पास्को हटा दी जाएगी।
पीड़ित युवती ने 13 जनवरी को 11 लोगों पर दिल्ली ले जाकर बंधक बनाने और सामूहिक दुराचार करने का मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में पीड़ित की उम्र सोलह साल दिखाई गई तो नियमानुसार आरोपियों पर पास्को एक्ट भी लगाया गया। शीशगढ़ पुलिस ने अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद रिपोर्ट लिख ली। गिरफ्तारी के डर से आरोपी उसी दिन से गांव छोड़कर फरार हो गए। 2013 में इसी लड़की के पिता ने गांव के दो लोगों पर बेटी से दुराचार की रिपोर्ट कराई थी। जिसमें पीड़ित की उम्र 18 वर्ष बताई थी। कायदे में उम्र अब बढ़ाकर दर्ज होनी चाहिए थी जो दो साल और कम हो गई। पुलिस को पीड़ित की वोटर आईडी मिली जिसमें उसकी उम्र 35 वर्ष अंकित थी। ऐसे में विवेचक ने पीड़ित की उम्र का सही आंकलन करने के लिए उसका मेडिकल परीक्षण कराया। डॉक्टरी रिपोर्ट पीड़ित की उम्र लगभग 25 साल मानी गई है।
वर्जन
कागजातों में तीन तरह की उम्र से विवेचना में दिक्कत आ रही थी। अब हम मेडिकल परीक्षण से तय उम्र के आधार पर विवेचना करेंगे। पीड़ित बालिग है, इसलिए मुकदमे से पास्को धारा हटाई जाएगी। घटना की सच्चाई खोलने के लिए पुलिस ने काल डिटेल समेत कई और तथ्य जुटाए हैं। यह बातें भी विवेचना में शामिल की जाएंगी। आरोपी अभी फरार हैं, उनकी गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस जुटी है - सुरेंद्र सिंह पवार, प्रभारी निरीक्षक, शीशगढ़