जरा सी चूक से रेलवे भंडार डिपो के एक खलासी की जान चली गई। डिपो में पेड़ काटने के दौरान एक कर्मचारी क्रेन (फार्कलिस्टर) से गिरकर घायल हो गए। मेडिकल कॉलेज में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हुए चीफ मैटीरियल डिपो अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया।
राजस्थान के जिला करौली टांडा भीम तहसील क्षेत्र के गांव मिर्जापुर निवासी सवाई सिंह मीना पूर्वोत्तर रेलेव इज्जतनगर मंडल में खलासी थे। वह यहां रेलवे वर्कशॉप के भंडार डिपो में तैनात थे। सोमवार को सवाई लाल समेत दो खलासी भंडार डिपो परिसर में खड़ी झाड़ियों की सफाई को लगाया गया था। पूर्वाह्न 11.30 बजे सवाई लाल फार्कलिस्टर ट्राली पर खड़े होकर बेर का पेड़ काट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पेड़ की डाल कटने के बाद फार्कलिस्टर ट्राली पर जा गिरी। ट्राली को किसी रस्सी या चेन से नहीं बांधा गया था। अचानक पेड़ की डाल गिरने से ट्राली असंतुलित हो गई। सवाई लाल नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। वहां मौजूद कर्मियों ने इसकी सूचना अफसरों को दी गई। वहां पहुंचे उपमुख्य सामग्री प्रबंधक जयंतीलाल कर्मचारियों की मदद से सवाई लाल को गाड़ी में डालकर भोजीपुरा मेडिकल कॉलेज ले गए। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां उन्हें डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
उधर, हादसे का पता लगने पर पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के विनय चतुर्वेदी, सुबोध सिंह, पंकज दत्त भट्ट, रजनीश चंद्र तिवारी नजमुल हसन, अनिल गौतम आदि कर्मचारी नेता पहुंच गए और अफसरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। उनका कहना था कि सवाई लाल को चढ़ाने से पहले ट्राली को ठीक से बांध लिया जाता तो हादसा नहीं होता। उनकी मांग पर चीफ मैटेरियल डिपो अधीक्षक राजवीर मीना को सस्पेंड कर दिया गया।
फाटक बंद न होता तो बच सकती थी जान
खलासी सवाई लाल को कार में डालकर भोजीपुरा मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे। तभी मंडल कार्यालय के सामने वाला रेलवे फाटक बंद हो गया। अधिकारियों ने फाटक खुलवाने की कोशिश की, लेकिन तब तक ट्रेन आ चुकी थी।
इसमें लापरवाही मानते हुए अधीक्षक राजवीर मीना को सस्पेंड कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। पोस्टमार्टम के बाद कर्मचारी का शव राजस्थान स्थित उनके पैतृक गांव भिजवा दिया है।
- जयंती प्रसाद, उपमुख्य सामग्री प्रबंधक