गुड वर्क में नाम जोड़ने के लिए पुलिस की झूठी कहानी गढ़ दी। दस वर्दीधारी, जिनमें तीन रिवाल्वर से लैस। उनके सामने से एक निहत्था तस्कर कैसे भाग गया वो भी पैदल।
पुलिस की मानें तो चेकिंग कर रही कोतवाल सुधीर पाल धामा के नेतृत्व वाली टीम में एसआई गिरीश चंद्र जोशी, कुतुबखाना चौकी प्रभारी संजय राय, कांस्टेबल नागेंद्र, योगेश, मोबीन खां, मोहम्मद याकूब, नरेंद्र, विकास और अरुण शामिल थे। इनमें कोतवाल, दरोगा गिरीश और चौकी प्रभारी संजय राय के पास रिवाल्वर था। चेकिंग रेलवे जंक्शन के सामने कैंट को जाने वाली रोड पर की जा रही थी। मुखबिर से सूचना मिलने के बाद रेलवे मनोरंजन सदन के सामने तस्करों की गाड़ी को घेरा गया। जहां पुलिस के दस जवान केवल एक तस्कर हसीब को पकड़ सके। दूसरा कार से उतरकर भाग गया। तस्करों के पास कोई असलाह भी नहीं था। इतने पुलिस वाले होने के बावजूद तस्कर शाहनूर का पीछा क्यों नहीं किया। क्या तस्कर को भागते देख पुलिस वाले हाथ बांधे खड़े रहे? गोली क्यों नहीं चलाई। जबकि मौके पर भीड़भाड़ भी नहीं थी।