लीलौर झील के बारे में कहा जाता है कि यहां युधिष्ठर ने यक्ष प्रश्नों के जवाब दिए। इस पौराणिक महत्व के स्थल को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए बरेली के तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने एक एक योजना बना कर दी। 13 करोड़ से ज्यादा की ये मंजूर भी हो गई और सिंचाई विभाग को इसे पुनर्जीत करने के लिए साढ़े आठ करोड़ का बजट भी मिल गया। आगे का काम पर्यटन विभाग, वन विभाग और दूसरे महकमों को करना था लेकिन सिंचाई विभाग का काम तो पूरा हुआ ही नहीं। मिट्टी डालने के नाम पर सपा के कुछ चहेते करीब ठेकेदारों ने कमाई कर ली। सोमवार को प्रुमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्र मौके पर गए। एक तरफ स्थानीय लोगों की आरोपों की झड़ी और उधर उनके सवालों पर अफसर लगभग निरुत्तर। झील का पानी तो लगता है यक्ष खुद पी गए। झील छीज रही है और यहां पानी लाने को कोई इंतजाम नहीं हो पाया।
खुदाई तो यहां कोई खास दिख नही रही कुछ मिट्टी इधर से उधर हुई। घाट के नाम पर कुछ सीढ़ियां सी बनी हैं।आठ करोड़ 38 लाख का बजट यूं ही खप गया। ऊपर वालों के आदेश पर यहां ठेके लेने वालों पर विभाग के अफसरों का भी कोई अंकुश नहीं था। ये काम अधूरा छोड़ कर खिसक लिए। प्रमुख सचिव सिचाई सुरेश चन्द्रा झील का नजारा देख कर दंग थे। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने के साथ ही बरेली के सिचंाई विभाग के प्रमुख अधिकारियों को मंगलवार को लखनऊ तलब किया है। प्रमुख सचिव मंत्री को रिपोर्ट देंगे, माना जा रहा कि कुछ अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने चुनाव से पहले भी इस घपले की जांच कराने की बात कही थी। उनके आदेश परही सोमवार को प्रमुख सचिव सरेश चन्द्रा निरीक्षण करने पहुंचे। झील का इतिहास जानने के बाद झील में हुए काम के बारे मे पूछा तो पता चला कि झील की खुदाई कराने का जिम्मा सिंचाई विभाग को ही मिला था। करीब 50 हेक्टेयर में फैली झील के 42 हैक्टेअर रकबे की खुदाई होनी थी। झील का सौदर्यकरण का पूरा प्रोजक्ट 13.70 करोड़ का था। जिसमे खुदाई पर 8.23 करोड खर्च किये गये थे। इसके अलावा बाकी की रकम से अन्य बिभागो को अपने कार्य पूर्ण कराने को जिम्मा दिया गया था। खुदाई अधूरी है और पुलिया कहीं की कहीं बना दी गई। पैदल मार्ग बनाया जो ध्ंास गया। बारिश में तो पूरा मार्ग ही तहस नहस हो जाएगा।
एई रामबहादुर यादव ने उन्हें बताया कि 20 ठेकेदार व 6 जेई लगाये गए थे। इस पर प्रमुख सचिव बोले क्या रेबड़ी थी जो सभी को बांटते रहे । लखनऊ से आए अन्य अधिकारियों ने कुछ बात संभाली और कहा कि सिंचाई विभाग के अलावा मत्स, उद्यान, पर्यटन, वन, सहित तेरह विभागों को काम कराने की जिम्मेदारी दी गयी थी। किसी ने अपने कार्य पूर्ण नही किये। वन विभाग को पौधे लगाने थे वो आज तक नहीं लगे। मौके पर पहुंचे सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के भाई डा0 मान सिंह ने कहा कि यहां बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है इसकी जांच निष्पक्ष करा कर दोषियो के विरूद्ध कडी कर्रवाई की जाए। मंत्री के बेटे ने कहा करोड़ों का घोटाला हुआ है। कई गांव के लोगों ने इस बात केसबूत भी प्रमुख सचिव को दिखाए।
पिछले समय हुई झील की खुदाई को लेकर हुये घोटाले की जांच कराई जायेगी। दोषियो के विरूद्ध कार्रवाई के साथ धन बसूली भी कराएंगे। झील मे पानी लाने के सभी रास्ते साफ कराने के साथ पानी की पूर्ति न होने पर विभाग की ओर से सरकारी नलकूपों का निर्माण कराया जाएगा।
सुरेश चन्द्रा प्रमुख सचिव सिंचाई लखनऊ
पहले झील में पानी तो लाओ
प्रमुख सचिव को लोगों ने बताया कि रामपुर की गांगिन नदी व अरिल नदी से इसमें पानी आता था खुदायी सही तरीके से नहीं करवायी गई है। पश्चिम से पूर्व को ढाल होना चाहिए जिससे नाले व बरसात का पानी आसानी से आ सके जबकि खुदायी में विपरीत किया गया है। जरूरत के हिसाब से पुलिया भी नहीं बनायी गयीं है।
मनमानी हुई है, जांच होगी
ऐतिहासिक स्थल का विकास होना था। सपा सरकार और सिंचाई विभाग ने अपने चहेतों से अनापशनाप काम कराया। इससे योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। अरिल, पीलिया आदि नदी खत्म हो गयी हैं। लीलौर झील विकास कार्य पर 8.38 करोड़ रुपये बहा दिए। उद्यान, बिजली, लोनिवि और वन विभाग ने कोई काम नहीं किया। हमने प्रमुख सचिव सुरेश चंद्र से मौके पर निरीक्षण और खामियां दूर कराने भेजा था। गड़बड़ियां और मनमानी सामने आयीं हैं, इसलिए जांच जरूर कराएंगे।
- धर्मपाल सिंह, सिंचाईं मंत्री
पूरा काम कराया
योजना शुरू कराने के लिए टेंडर मांगे गए थे। बजट में जो राशि मिली नियमानुसार खर्च हुई है। अन्य कार्य उद्यान, बिजली, लोनिवि और वन विभाग आदि को कराने थे। इन विभागों ने कोई काम नहीं किया। अब लोग तरह तरह की शिकायतें कर भ्रम फैला रहे हैं।
- आरबी यादव, अधिशासी अभियंता