सीवर टैंक के झगड़े में दबंग पड़ोसियों ने हथियारों से लैस होकर आधी रात को पड़ोसी के घर में घुसकर हमला कर दिया। घर वालों को लाठी-डंडों से पीटा और लूटपाट की कोशिश की। 12 साल के बच्चे ने हमलावर को पहचाना तो उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। घरवालों को बांध दिया था तो वे सिर्फ चीखते चिल्लाते रहे। बच्चे सांसे थमते ही तीनों हमलावर भाग गए। डॉग स्क्वाड और फील्ड यूनिट की टीम भी मौका मुआयना करने पहुंची। देर शाम तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों ने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया।
गांव के कांता प्रसाद और भोपाल सिंह का घर एक मकान छोड़ कर बना हुआ है। एक साल से दोनों के बीच रास्ते में सीवर टैंक बनाने को लेकर विवाद चल रहा है। कांता प्रसाद, भोपाल सिंह को रास्ते में टैंक नहीं बनाने दे रहे थे। इसे लेकर भोपाल सिंह की शुक्रवार की सुबह उनसे कहासुनी भी हो गई थी। देर रात करीब एक बजे भोपाल सिंह, महेंद्र और गोपी चंद्र सीढ़ी लगाकर छत में चढ़े और कांता प्रसाद के घर में घुस गए। घर के सभी लोग आंगन और कमरों में सो रहे थे। तीनों से सबसे पहले कांता प्रसाद का मुंह चादर से बंद किया फिर पीटना शुरू कर दिया। तमंचा दिखाकर तीन महिलाओं समेत परिवार के सभी लोगों को बंधकर बना लिया। सभी की तमंचों, लाठी-डंडों से पिटाई कर दी। इसके बाद आलमारी और संदूक के ताले तोड़ दिए। हालांकि उनके हाथ कुछ नहीं आया। कांता प्रसाद के 12 साल के बेटे वीरपाल ने महेंद्र को पहचान लिया और नाम लेकर चीखने लगा। इससे भड़के महेंद्र ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। उसकी बहन नीलम का भी गला दबाया गया। इसके बाद हमलावर छत की ओर से फरार हो गए। घर में कोहराम मच गया। शोर शराबा होने पर गांव के लोग पहुंच गए। पुलिस भी पहुंच गई मगर दहशत में कांता प्रसाद और उनके परिवार के लोग सिर्फ रोते रहे। वीरपाल को गांव के एक डॉक्टर के पास ले जाया गया वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। सीओ प्रमोद यादव ने घटनास्थल का मुआयना किया। बरेली से फील्ड यूनिट व डॉग स्क्वाड टीम ने गांव आकर छान बीन की। देर शाम को पुलिस ने बसुधरन चौराहे से हत्यारोपी महेंद्र पाल, भोपाल सिंह और गोपी चंद्र को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया।
ये तो महेंद्र अंकल हैं
वीरपाल को जब घर में घुसे हत्यारे बंधक बना रहे थे तो उसकी मुंह से निकल गया कि अरे ये तो महेंद्र अंकल हैं। आप ऐसा क्यों कर रहे हैं...यह कहना ही उस नन्हीं जान के लिए आखरी सांस बन गया। हमलावरों में पहचाने जाने से इस कदर गुस्सा भरा कि उन्होंने बच्चे की गर्दन दबा दी और घरवालों के सामने ही मार डाला।
मेरे लाल को मेरी आंखों के सामने मार दिया
पुलिस पहुंचने के बाद भी कांता प्रसाद चुप्पी साधे रहे। डॉग स्क्वाड टीम का खोजी कुत्ते बार-बार महेंद्र के घर के अंदर जाता रहा। पुलिस के बार-बार कहने के बाद भी कांता प्रसाद तहरीर देने को राजी नहीं हुए। एसओ अमर सिंह उन्हें अकेले में ले गए और घटना के बारे में बताने का आग्रह किया। इस पर उन्होंने रोते हुए कहा कि मेरे लाल को मेरे आंखों के सामने ही मार डाला साहब। अब वे हमें भी मार डालेंगे। एसओ ने पूरे परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने और आरोपियों का कड़ी सजा दिलाए जाने का वादा किया तो कांता प्रसाद ने पूरा घटनाक्रम बता दिया। इसके बाद नामजद तहरीर लिखी गई। फील्ड यूनिट की टीम ने महेंद्र पाल के घर से निशानों के नमूने भी लिए।
पूरे परिवार के कत्ल की थी योजना
महेंद्र पाल ने पुलिस को बताया कि उसके पूरे परिवार का कत्ल करने की योजना थी लेकिन परिवार के लोगों के गिड़गिड़ाने के बाद इरादा बदल लिया था। हम दहशत फैलाना चाहते थे। मासमू वीरपाल ने मेरा नाम लेकर ललकारा उसके बाद जोर जोर से चीखने लगा। बस इस पर गुस्सा आ गया और उसका गला दबा दिया।
छह महीने पहले भी हुआ था विवाद
सीवर टैंक को लेकर छह महीने पहले भी दोनों में विवाद हुआ था। कांता प्रसाद का तर्क था कि रास्ता सार्वजनिक है। सीवर टैंक बनने के बाद मकानों में सीलन होगी और बदबू से लोग परेशान होंगे। हालांकि तब किसी ने पुलिस से शिकायत नहीं की थी।
जिसने सुना वही दौड़ पड़ा
पखुरनी गांव के लोग दहशत में हैं। पड़ोसी इस तरह दुस्साहस कर जान ले लेगा उन्होंने सोचा भी नहीं था। कांता प्रसाद के घर दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। कांता और पत्नी मुन्नी देवी अपने लाड़ले वीरपाल के शव से हटे ही नहीं। लोगों ने ढांढस बधाकर उन्हें संभाला। हर किसी की आंखें नम थी। तीनों हत्यारों के खिलाफ गुस्सा था। मासूम की बहन नीलम, भाई परमेश्वरी और भूपराम का भी रो रो कर बुरा हाल था।