‘मैं जीना नहीं चाहता, मुझे मर जाने दो। मेरी दोनों किडनी खराब हैं, बीमारी के कारण नौकरी चली गई। परिवार वाले खाने को मोहताज हैं, पत्नी कहती है कहीं जाकर मर जाओ। आज मैं सोचकर घर से चला कि जान दे दूंगा, जाने कैसे बच गया, मेरे जहर का इंजेक्शन लगाकर मुझे मार डालो।’ जिला अस्पताल की इमरजेंसी में खून से लथपथ पड़ा युवक इस तरह अपनी लाचारी और जिंदगी खत्म करने की वजह बता रहा था। रविवार देर रात युवक को इज्जतनगर स्टेशन से घायल अवस्था में लाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसने ट्रेन से कटकर आत्महत्या करने की कोशिश की।
युवक के पर्स में एक कागज मिला, जो उसने मौत के बाद अपनी शिनाख्त के लिए रखा था। बिथरीचैनपुर के रामनगर गांव के पूरनलाल का बेटा अमर सिंह ने बताया कि वह अपनी पत्नी सविता और तीन बेटों के साथ दिल्ली में रहता था। वहां वह एक जूता निर्माण करने वाली कंपनी में ठेकेदार था। एक साल पहले उसे पता लगा कि उसकी दोनों किडनी खराब हो गईं हैं, वह बीमार रहने लगा और नौकरी छूट गई। वह अपने पिता के पास गांव आ गया। युवक का कहना है कि यहां कोई नौकरी नहीं मिल सकी, बीमारी के इलाज में पहले जोड़ा रुपया धीरे-धीरे खत्म हो गया है। बिलखते हुए युवक ने बताया कि पिता का सेलर और आटा चक्की है पर वह उससे बात नहीं करते। पत्नी और उसके भाई ने बताया कि सुबह पति रुहेलखंड अस्पताल दवाई लेने की बात कहकर घर से निकले, उनके पास फोन नहीं है। डॉक्टर ने युवक की हालत गंभीर बताई है, वह बार-बार मरने की बात कहता रहा।