बहेड़ी। इमाम अतीक रजा के घर बृहस्पतिवार रात छह से ज्यादा नकाबपोश बदमाशों ने डकैती डाल ली। दीवार कूदकर दाखिल हुए बदमाशों ने असलाह दिखाकर घर वालों को एक कमरे में बंद कर दिया फिर इत्मीनान से पूरे घर को खंगाला। बदमाश आलमारी में रखे करीब पांच तोला सोने के जेवर और सवा लाख रुपये समेट ले गए। पुलिस और फील्ड यूनिट ने छानबीन कर मामला दर्ज कर लिया है।
बदमाशों ने मोहल्ला नई बस्ती शाहजी नगर निवासी इमाम अतीक रजा के पिता रईस अहमद को जगाया और फावड़ा, तमंचा और डंडा दिखाकर चुप रहने की धमकी दी। इसके बाद उन्हीं से घर के अन्य लोगों को जगाकर कमरे में बंद कर दिया। बदमाशों ने आलमारी की चाबी मांगकर करीब छह तोले के सोने के जेवरात, सवा लाख रुपये नकद कब्जे में ले लिये। इसके बाद इमाम की बहन रिजवाना के कान के कुंडल उतरवा लिए। वारदात के बाद बदमाश बार से कुंडी लगाकर फरार हो गये। इमाम अतीक रजा ने बाजार मोहल्ले में रहने वाले अपने परिचित तस्कील अहमद को फोन कर वारदात की जानकारी दी। तस्कील अहमद ने चौकी इंचार्ज सलाउद्दीन को फोन कर बुलाया। उन्होंने कमरे में बंद पडे़ लोगों को बाहर निकाला। परिजनो को बाहर निकाला। उन्होंने काफी देर तक छानबीन की लेकिन उनके हाथ कोई सुराग नही लगे। दोपहर बाद बरेली से फील्ड यूनिट की टीम पहुंची। टीम ने दीवार पर बने डकैतों के पैरों और हाथों के निशानों के नमूने लिए। करीब पांच सौ मीटर दूर अकबराबाद रोड पर एक खेत में जेवरों के खाली डिब्बे पडे़ मिले। पुलिस ने इमाम के पिता रईस अहमद की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सीओ प्रमोद यादव ने घटनास्थल का मुआयना कर जल्द खुलासे के आदेश दिए हैं।
मेरे वालिद की निशानी भी ले गए
इमाम के पिता रईस अहमद ने बताया कि उनके वालिद को 1987 में उनकी मां ने हज के दौरान एक घड़ी लाकर दी थी। उनके लिए यह उपहार था। बदमाश उसे भी ले गए। रईस अहमद के अनुसार बदमाश संकेतों में बात कर रहे थे। चार बदमाश गठीले जिस्म के थे जबकि दो दुबले-पतले थे।
घर के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी
बदमाशों को इमाम के घर के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी। कहां पर इमाम के पिता सोते हैं और जेवर कहां रखे थे इसका आइडिया पहले से ही होने के कारण पिता को ही निशाने पर लिया।
बहन की निकाह के लिए जोड़ा था जेवर
इमाम अतीक रजा ने बताया कि वह अपनी बहन रिजवाना के निकाह के लिए जेवर जोड़ रहे थे। वह काफी दिनों से बहन के लिए अच्छा रिश्ता तलाश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रिजवाना ने मोबाइल से कई बार 100 नंबर पर डायल किया मगर पुलिस का फोन नहीं उठा।
बदमाशों ने एक नहीं सुनी
इमाम अतीक रजा ने बताया कि उन्होंने बदमाशों को पहले अल्लाह और देवी देवताओं का वास्ता दिया कि वे ऐसा न करें मगर उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। यह भी कहा कि 11 वीं शरीफ का महीना चल रहा है। अगर मुसलमान हो तो चले जाओ। एक बदमाश ने छोड़ देने की बात कही तो दूसरे ने गालियां देकर सामान समेट लेने को कहा।