फतेहगंज पश्चिमी। शंखा बल्लिया गांव में शनिवार शाम एक युवक ने अपने पिता पर इतने डंडे बरसाए कि वह वहीं ढेर हो गया। इसके बाद आरोपी भाग निकला। मृतक के छोटे भाई ने आरोपी को मंदबुद्धि बताकर हत्या की तहरीर दी है, पुलिस रिपोर्ट लिखने के साथ ही आरोपी की तलाश में जुटी है। घरवालों के अनुसार वह शादी के लिए कहता था लेकिन मानसिक रूप से कमजोर होने की वजह से ही शादी नहीं हो रही थी।
शंखा बल्लिया निवासी 52 वर्षीय गंगाराम मौर्य की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। वह अपने छोटे बेटे शिवरतन के साथ रह रहे थे। साले का बेटा अनिल भी इन्हीं दोनों के संग रहकर पढ़ाई कर रहा था। गंगाराम के छोटे भाई हेतराम इसी गांव में अलग मकान में पत्नी-बच्चों के संग रह रहे हैं। शनिवार शाम गंगाराम खाना खाकर घर के बाहर गेट पर बैठे थे। तभी शिवरतन डंडा लेकर घर से निकला और पिता गंगाराम के सिर पर पीछे से ताबड़तोड़ डंडे बरसाने लगा। लगातार डंडे मारने से गंगाराम का सिर फट गया और ज्यादा खून बह जाने से उनकी कुछ ही देर में मौत हो गई। जब तक लोग इकट्ठे हुए शिवरतन जंगल की तरफ भाग गया। सरेशाम हत्या की सूचना पर एसओ अशोक कुमार यादव मय पुलिस फोर्स गांव पहुंचे और शव का पंचनामा भरवाकर पोस्टमार्टम को भिजवा दिया। मृतक के छोटे भाई हेतराम ने भतीजे शिवरतन को मंदबुद्धि बताते हुए अपने ही पिता को डंडे से पीटकर मार डालने की तहरीर दी है। एसओ ने बताया कि तहरीर के आधार पर हत्या की एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। जल्द ही हत्यारोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
दुल्हन की धुन में हत्यारा बन गया
फतेहगंज पश्चिमी। शंखा बल्लिया गांव के गंगाराम मौर्य का बड़ा बेटा करनपाल बीवी-बच्चों के साथ कई साल से फरीदपुर अपनी ससुराल में रह रहा है। गंगाराम की पत्नी सोमवती की आठ माह पहले बीमारी से मौत हो गई थी। दिमागी तौर पर कुछ कमजोर होने की वजह से शिवरतन की शादी नहीं हो पाई थी। कई साल से शिवरतन को शादी की धुन सवार थी। साल भर पहले पंद्रह हजार रुपये लेकर वह औरत लाने के लिए कहीं बाहर गया भी था। ट्रेन में किसी ने जेब काट दी। पूरी रकम निकल जाने पर उसे बैरंग लौटकर गांव आना पड़ा। पिछले कुछ महीनों से उसे फिर यही धुन सवार हो गई थी। उठते-बैठते औरत लाने की जिद करता रहता था। पिता गंगाराम उसकी मानसिक स्थिति को देखकर उसे समझाने की कोशिश करते तो वह और चिढ़ जाता। तीन दिन पहले औरत लाने के लिए रकम मांगने पर बाप ने झिड़क दिया था, तभी से वह उनसे सख्त नाराज था। शनिवार शाम पिता गंगाराम ने खाना खाने को कहा तो खाना खाने की बजाय वह भनभनाता हुआ घर से निकल गया। कुछ देर बाद वह घर लौटा। उस वक्त गंगाराम खाना खाकर घर के बाहर गेट पर बैठे थे। मंदबुद्धि शिवरतन दबे पांव बाप के पीछे पहुंचा और डंडों से पीटकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। एसओ अशोक कुमार यादव भी मान रहे हैं कि हत्या सोची समझी रणनीति के तहत नहीं, बल्कि खास जुनून और सनक में की गई है।
पिता को भट्ठे में झोंकने की कोशिश भी की थी
फतेहगंज पश्चिमी। मंदबुद्धि शिवरतन के जेहन पर औरत पाने की सनक इस कदर सवार थी कि अपने बाप को ईंट भट्ठे में झोंकने की कोशिश तक कर चुका था। दरअसल बाप-बेटे कई महीने तक गांव के पास के ही एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी भी कर चुके हैं। इसी दौरान औरत लाने से इंकार पर गुस्से में शिवरतन बूढ़े बाप को धधक रहे ईंट भट्ठे की तरफ ले गया था और भट्ठे में झोंककर जान लेने की कोशिश भी की थी। हालांकि साथी मजदूरों ने बमुश्किल गंगाराम को शिवरतन के चंगुल से बचाया था।