प्रेमनगर पुलिस ने धर्मेंद्र कुमार उर्फ डीके के अपहरण और हत्याकांड का खुलासा रविवार को कर दिया। आरोपियों ने डीके का गला दबाने के बाद लाश चनेहटी नाले में फेंक दी थी। रविवार को प्रेमनगर और कैंट पुलिस नाले में उसके शव को तलाशती रही।
क्योलड़िया थाना क्षेत्र के रहने वाले डीके का दो जुलाई को डेलापीर से अपहरण कर लिया गया था। इसमें इंद्रानगर के अनिल यादव और मनोज आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अनिल हिस्ट्रीशीटर रहे शेरू यादव का भाई है। इसके बाद अनिल एक दूसरे मामले में कोर्ट में सरेंडर कर जेल चला गया। करीब सप्ताह भर पहले पुलिस ने अनिल को जेल से रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। उसकी निशानदेही पर डीके के कपड़े फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र में किछा नदी के किराने बरामद किए थे। अनिल से मिले इनपुट के आधार पर शनिवार को पुलिस ने डेलापीर के अरविंद और सोनू को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अरविंद व सोनू ने पुलिस को बताया कि अनिल दावत खिलाने के बहाने कार में बैठाकर उन्हें और डीके को अपने साथ ले गया था। अनिल के साथ उसका एक मामा भी था। चनहेटी में बैठकर सबने शराब पी। इसके बाद वहीं लाल रंग के गमछा से गला दबाकर डीके की हत्या कर दी। उसकी लाश को चनेहटी नाले में बहा दिया गया था। रविवार को प्रेमनगर पुलिस ने चनेहटी जाकर नाले में डीके की लाश को तलाश किया। इसमें कैंट पुलिस का भी सहयोग लिया गया। दरअसल शेरू यादव डेलापीर पर अवैध टेंपो स्टैंड चलाता था। उसकी हत्या के बाद शेरू के दोस्त ललित ने अवैध स्टैंड पर कब्जा कर लिया। यही नहीं वह शेरू की पत्नी को भी अपने साथ रखने लगा। तब अनिल को शेरू की हत्या में ललित का हाथ होने का पता चला। आटो स्टैंड पर ललित के लिए डीके पर्ची काटता था। अनिल ने सोचा कि डीके को रास्ते से हटाने पर स्टैंड उसके कब्जे में आ जाएगा।