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डीआईजी की भी नहीं सुन रहे कप्तान

Tue, 23 Aug 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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पशु तस्करों और पुलिस के गठजोड़ के आगे डीआईजी आशुतोष कुमार के भी हाथ खड़े हैं। हालत ये है कि उनके मातहत इस मामले में उनकी सुन ही नहीं रहे। उन्होंने बरेली रेंज के सभी जिलों में पशु तस्करों से बरामद पशुओं का हिसाब मांगा था, लेकिन किसी भी कप्तान ने उन्हें सूचना ही नहीं भेजी है। चारों जिलों के पुलिस अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं जबकि इसी साल अब तक इन चारों जिलों की पुलिस ने पशु तस्करों से करीब ढाई हजार पशु बरामद किए हैं।
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बरेली जिले के फतेहगंज पूर्वी, बिथरी चैनपुर, फरीदपुर, देवरनिया, भुता, फतेहगंज पश्चिमी और मीरगंज के अलावा इज्जतनगर और हाफिजगंज इलाके में सबसे ज्यादा गौवंशीय पशु पकड़े जाते हैं। पुलिस के पहुंचने के चंद मिनट पीलीभीत की गौशाला के नाम से रसीद लेकर मौके पर पहुंच जाते हैं। जबकि किला इलाके में भी गौशाला है। पुलिस यहां पशुओं को देने से कतराती है। इसके पीछे वजह क्या है। पशुओं को पीलीभीत की गौशाला को क्यों दिया जाता है, कोई बताने को तैयार नहीं है। डीआईजी ने शिकायतें मिलने पर चारों जिलों के पुलिस अधिकारियों से पकड़े गए और दोशालाओं को भेजे गए पशुओं का हिसाब मांगा था। उन्होंने यह भी पूछा था कि किस जिले में कितनी गौशालाएं पंजीकृत और अपंजीकृत हैं। जिन गौशालाओं को पशु दिए गए हैं, वहां पशु हैं या नहीं। पशु गौशालाओं के पास नहीं हैं तो किसके पास गए हैं, लेकिन किसी भी जिले से अभी तक सूचना नहीं आई है। डीआईजी यह सूचना मंगाने के लिए चारों जिलों को कई रिमांइडर भी भिजवा चुके हैं। इसके बाद भी उन्हें सूचना नहीं दे रहे हैं।   
 बरेली जोन में इस साल अब तक पशु तस्करों के खिलाफ लिखे गए मुकदमे
जिला        पशु तस्करी के मुकदमे
बरेली         150
बदायूं         113
शाहजहांपुर     93
पीलीभीत     135
 पशु तस्करों से पकड़े जाने वाले पशुओं किन गौशालाओं को जाते हैं। वहां जाने के बाद उनका क्या होता है।  चारों जिलों को पत्र लिखकर पशुओं के बारे में जानकारी मांगी थी, लेकिन अभी तक किसी ने सूचना नहीं दी है। मंगलवार को चारों जिलों के पुलिस अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है। उसमें सभी से सूचना लेकर आने को कहा है
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- आशुतोष कुमार, डीआईजी
कई जिलों तक फैले पशु तस्करों के तार
बदायूं। पशु तस्करों का नेटवर्क बदायूं से निकल कर इटावा, मैनपुरी, एटा, फर्रुखाबाद, कासगंज तक फैल गया है। उसहैत में अटैना और कादरचौक में कादरगंज गंगा पुल बनने के बाद पशु  तस्करों का काम आसान हुआ है। इसके साथ ही दातागंज में रामगंगा पर बेलाडंडी पुल बनने के बाद बदायूं से शाहजहांपुर की दूरी भी कम हो गई है। ये तीनों पुल पशु तस्करों के लिए काफी मुफीद साबित हो रहे हैं।
सबसे बड़ी बरामदगी भी डंडे बस्ते में 
छह फरवरी 2015 को जिले में सबसे बड़ा अभियान चला। पुलिस ने गोवंशीय पशुओं से भरे 75 वाहन पकड़े थे। वाहनों से सैकड़ों पशु बरामद हुए। 100 पशु तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। यह मामला भी डंडे बस्ते में चला गया है। 
सुपुर्दगी में  खेल 
 गोवंशीय पशुओं की सुपुर्दगी में भी खेल हो रहा है।  जिलों में कई गोशालाओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जिनकी तस्करों से साठगांठ रहती है। यहां से पशुओं को फिर तस्करों को सौंप दिया जाता है।दो महीने के दौरान गोवंशीय पशुओं की बरामदगी पर गौर करें तो यह आठवीं बड़ी बरामदगी है। इससे पहले दातागंज में तीन बार गोवंशीय पशुओं की बड़ी बरामदगियां हो चुकी हैं। 
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