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नहीं हुई राशन के डकैतों पर कार्रवाई

Sun, 28 Jun 2015 01:47 AM IST
बरेली
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 गरीबों के राशन पर डाका डालने वाले असली गुनहगारों की बचाने की पूरी तैयारी है। प्रशासन हो या खाद्य विभाग या फिर पुलिस इतने संवेदनशील मामले 24 घंटे बाद भी यह नहीं पता लगा पाए यूपीएसएफसी के गोदाम से किस कोटेदार को राशन जारी किया गया था। 36 घंटे गुजर गए आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा कराने की संस्तुति लेने के लिए डीएम के पास फाइल भी नहीं भेजी गई है।
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जिलाधिकारी लखनऊ में होने वाली दो बैठकों के लिए निकल गए हैं और दो जुलाई को वापसी करेंगे। यानी राशन के डकैतों पर तब तक मुकदमा दर्ज नहीं हो पाएगा। राशन डकैती के गुनहगारों को बचाने की कवायद शुक्रवार को तभी से शुरू हो गई थी जब  सूचना मिली थी। अंदर राशन उतर रहा था और बाहर पुलिस खड़ी थी लेकिन सरकारी राशन को राइस मिल पर उतारने वालों में से कोई भी गिरफ्तार नहीं हो पाया है। बाद में पुलिस ने भी कह दिया कि फरार हो गए। यानी माफिया की सेटिंग सब जगह है।
सरकारी चावल पकड़े जाने के बाद प्रशासन और खाद्य विभाग को पता करना था कि यह राशन किस किस कोटेदार को दिया गया था या फिर विभागीय आदमियों की मिलीभगत से सरप्लस किया हुआ राशन तो नहीं बेचा गया है। 24 घंटे बाद यह नहीं पता किया जा सका कि चावल किसने बेचा। कोटेदार बसई का राशन होने के नाम पर वहां जांच जरूर की गई रिकार्ड में 175 क्विंटल का स्टाक दो दिन पहले लोगों में बांटा जा चुका है।  कई लोगों के फोन स्विच आफ रहे तो अधीनस्थों ने बीमारी का बहाना बनाकर कुछ भी जानने से इंकार किया। पूर्ति निरीक्षक से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका। विभागीय अधिकारी प्रशासन के कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं वहीं एसडीएम ने वीआईपी ड्यूटी में होने का हवाला देकर कुछ बता पाने में असमर्थता जताई जबकि उन्हें ही एफआईआर करानी थी। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि मामले में राइस मिल के मालिक मुजीबुर्रहमान और ट्रैक्टर चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है।
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शुरूआत से ही लीपापोती
राशन की कालाबाजारी करने वालों ने उप्र खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम लिमिटेड, दिवना रोड मीरगंज स्थित गोदाम से शुक्रवार दोपहर 225 क्विंटल गेहूं और चावल ट्रैक्टर ट्राली में भरवाया और दुनका की एबी राइस मिल में उतरवा दिया था। उच्चाधिकारियों से शिकायत करने पर नायब तहसीलदार अवधेश कुमार, पूर्ति निरीक्षक हरिनाम दास गुप्ता, पूर्ति लिपिक कासिब सगीर और पुलिस मौके पर पहुंची थी। टीम ने राइस मिल में 242 कट्टे गेहूं और 197 कट्टा सरकारी चावल पकड़ा था। इस राशन को दुनका कोटेदार जमील अहमद की सुपुर्दगी में देकर उनके घर भिजवा दिया था।  राशन लाने वाले और उतारने वालों में से कोई भी गिरफ्तार नहीं हुआ।

ठेके पर दे रखी है राइस मिल
मिल मालिक मुजीबुर्रहमान का कहना है कि 21-22 मई 2007 की रात मिल पर पिता वकालुर्रहमान की हत्या के बाद 16 मई 2009 को मिल से लौटते वक्त उनको को भी गोली मारकर जानलेवा हमला किया जा चुका है। तब से मिल ठेके पर चलवा रहे हैं। पिछले दो साल से ठेका दुनका के शकील अहमद, फहीम अहमद पर है।  
क्या घटतौली का गल्ला था?
पूर्ति विभाग एक तरफ तो बरामद गल्ले को सरकारी मान रहा है वहीं यह भी दावा कर रहा है कि मीरगंज स्थित गोदाम में राशन स्टाक रजिस्टर के मुताबिक दुरुस्त है। वहीं बसई कोटेदार का स्टाक भी सही मिला है। सवाल उठता है कि क्या यह राशन गल्ला कोटेदारों को दिए जाने वाले स्टाक से घटतौली कर इकट्ठा किया गया और फिर ब्लैक कर दिया गया।

सुपुर्दगी पर भी सवाल
जिस दुनका कोटेदार की सुपुर्दगी में राशन दिया गया है, राइस मिल में उनका भी शेयर है।  ऐसे में एफआईआर दर्ज करवाने में देरी भी सवालिया निशान खड़े कर रही है।

वर्जन

मैं प्रमुख सचिव स्वास्थ्य की वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त था। इस केस में अभी कुछ नहीं बता पाऊंगा।
रामेश्वर नाथ तिवारी, एसडीएम मीरगंज

जांच और कार्रवाई एसडीएम प्रशासन को करनी है। मामले में धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज होना है। मुकदमा डीएम की अनुमति के बाद ही दर्ज होगा। सुपुर्दगी किसी को भी दी जा सकती है।
केएल तिवारी
जिला पूर्ति अधिकारी

कोटेदार का पता लगाया जा रहा है। शुक्रवार को पांच-सात कोटेदारों को राशन दिया गया है। जांच हो रही है। रविवार को कोटेदार का नाम बता दिया जाएगा।
ओपीएस मलिक
जिला प्रबंधक, यूपीएसएफसी

मुकदमे की संस्तुति के लिए फाइल नहीं आई है। मैं बैठक के लिए लखनऊ निकल गया हूं। दो जुलाई को लौटने के बाद संस्तुति होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्पष्ट और सही जांच कर रिपोर्ट तैयार कर लें।  
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गौरव दयाल, जिलाधिकारी
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