बलरामपुर के मौलवी का शव सुभाषनगर इलाके में पड़ा मिला। उनके पास से मिली मैलवी डिग्री के अंक पत्र से शव की पहचान हुई। पैर में जूते न होने से अंदेशा जताया जा रहा है कि उनकी हत्या कहीं और करने के बाद शव यहां फेंका गया हो सकता है। पुलिस ने मौत का कारण जानने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सुभाषनगर के गांव बेनी चौधरी निवासी मंगल मौर्य का गांव के पास ही खेत है। उनके खेत में बृहस्पतिवार सुबह शौच के लिए गए ग्रामीणों ने एक युवक का शव पड़ा देखा। मृतक के सिर पर टोपी थी और वह सफेद कुर्ता पायजामा पहने था। उसके मुंह से खून निकल रहा था और पैर में न ही जूते थे और न चप्पल। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। एसओ सुभाषनगर जेपी यादव ने बताया कि युवक के पास से मौलवी डिग्री का एक अंक पत्र मिला। जिस पर उसका नाम नौशाद (21) पुत्र सुबराती निवासी तुलसीनगर (बलरामपुर) अंकित था। जिस मदरसे से मौलवी डिग्री का अंकपत्र जारी हुआ, पुलिस ने वहां संपर्क किया तो उसकी शिनाख्त हो गई। पता चला कि युवक ने इस मदरसे से वर्ष 2013 में मौलवी की शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली के पहाड़गंज में कामकाज करने के सिलसिले में रहता था। उसके पास से एक पर्स मिला, जिसमें पचास रुपये और उसके कुछ पासपोर्ट साइज के फोटो थे। वह 22 दिसंबर को दिल्ली से चला था और उसके पास लखनऊ तक का टिकट था। ऐसे में युवक बरेली में उतरकर बेनी चौधरी गांव के पास कैसे पहुंच गया, पुलिस इसकी जांच कर रही है। एसओ ने बताया कि नौशाद के घरवालों को सूचना पहुंचा दी गई है, वह बरेली के लिए चल दिए हैं। शुक्रवार को उसके शव का पोस्टमार्टम होने के बाद ही मौत का सही कारण पता चल सकेगा।
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हालात कर रहे हैं हत्या की ओर इशारा
नौशाद का शव मिलने के बाद तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। जिस स्थान पर उसका शव पड़ा था, वहां किसी के जूते के निशान बने हैं। जबकि नौशाद के पैरों में न ही चप्पल थी और न जूते। दूसरा सवाल उठता है कि जब वह दिल्ली से लखनऊ तक की टिकट लेकर ट्रेन में बैठा था, तो बेनीपुर चौधरी गांव के पास कैसे पहुंच गया। उसके जूते-चप्पल कहां गए?