कटरी में आतंक का पर्याय रहे नरेशा धीमर के साले दस हजार के इनामी मदनपाल उर्फ जंटरू को मदनापुर पुलिस ने शुक्रवार की रात मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। जंटरू को गैंग का मास्टर माइंड कहा जाता था। इसके खिलाफ हत्या, अपहरण और डकैती के एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
एसपी शाहजहांपुर आरपीएस यादव ने प्रेसवार्ता में बताया कि अंतर जोनल गिरोह का सरगना नरेशा धीमर नौ फरवरी 2008 को थाना कटरा क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारा गया था। नरेशा गैंग में 22 सदस्य रजिस्टर्ड थे, जिसमें 21 वें नंबर का सदस्य मदनपाल उर्फ जंटरू था। जंटरू मदनापुर क्षेत्र के गांव गाजीपुर का रहने वाला है। नरेशा गैंग ने दिसंबर 2007 में मदनापुर क्षेत्र के गांव ढुकुरी खुर्द निवासी बृजेश सिंह का अपहरण कर लिया था। बृजेश को छुड़ाने के लिए पांच दिसंबर 2007 आईजी की एसओजी टीम की नरेश गैंग से थाना जलालाबाद क्षेत्र में मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में जंटरू ने एसओजी के सिपाही यशवीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद आईजी की तरफ से जंटरू पर दस हजार का इनाम घोषित किया गया था। शुक्रवार की रात को मदनापुर पुलिस ने गांव बरुआ चचोर मार्ग पर गाजीपुर के गांव के पास मुठभेड़ के दौरान जंटरू को गिरफ्तार किया। उसके पास से एक तमंचा और दस कारतूस बरामद हुए।
पुलिस का सूचना तंत्र फेल
कांधरपुर में घर बनाकर रह रहा था जंटरू
कहीं की पुलिस को भनक तक नहीं लगी
नरेशा गैंग की मदद से ही जंटरू का परिवार बरेली कैंट थाने के कांधरपुर गांव में आकर बस गया था। पुलिस का सूचना तंत्र इतना फेल रहा कि वह अपने परिवार के अक्सर मिलने आता था लेकिन किसी जिले की पुलिस को उसकी भनक तक नहीं लगी।
पुलिस के मुताबिक जंटरू के परिवार में उसके पिता सुखलाल, माता कमला, छह भाई बुद्धपाल, गुड्डू, पप्पू, राकेश उर्फ कैलाश, धर्मवीर और जयवीर हैं। दो बहनें महारानी और गुड्डी हैं। गुड्डी की शादी नरेशा धीमर से हुई थी। उसका बड़ा भाई मदनापुर क्षेत्र के गांव हत्सा में अपनी ससुराल में रहता है। उसकी पत्नी सोनवती की 12 साल पहले मौत हो गई। उससे 12 साल का बेटा सोनू है। जंटरू ने बताया कि पहले तो पुलिस से बचने लिए बरेली में इधर-उधर छुपते रहे। इसके बाद उसके पिता ने थाना कैंट क्षेत्र के गांव कांधरपुर में मकान बना लिया। नरेशा की पत्नी गुड्डी भी उन्हीं के साथ रहती है। एक सप्ताह पहले ही वह अपने परिवार से मिलने कांधरपुर आया था। आठ अप्रैल को वह अपने बड़े भाई बुद्धपाल से मिलने गांव हत्सा गया था। यहां से वह अपने गांव गाजीपुर जा रहा था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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जंटरू का आपराधिक इतिहास
- थाना मदनापुर में ढुकुरी खुर्द निवासी बृजेश सिंह के अपहरण के मामले में मुकदमा।
- जलालाबाद में पुलिस मुठभेड़ में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा आदि की धारा में मुकदमा।
- थाना कांट में पिपरौला निवासी बबलू के अपहरण का मुकदमा।
- थाना कटरा में व्यापारी प्रेमचंद्र गुप्ता के अपहरण के मामले में मुकदमा।
- थाना जैतीपुर के गांव केशवपुर निवासी धर्मेंद्र कुमार के अपहरण मामले में मुकदमा।
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जंटरू की जुबानी फरारी की कहानी
मदनपाल उर्फ जंटरू ने बताया कि 2002 में एक अपहरण के मामले में वह दो साल के लिए जेल में था। जेल में उसकी कल्लू गैंग के कई सदस्यों से मुलाकात हुई। नरेशा का साला होने की वजह से उसे काफी सम्मान मिलने लगा। जेल से छूटने के बाद वह अपने बहनोई नरेशा से मिलकर कल्लू गैंग में शामिल हो गया। गैंग के साथ अपहरण की घटनाओं को अंजाम देने लगा। 2005 में कल्लू की मौत के बाद गैंग की कमान उसके बहनोई नरेशा ने संभाल तो वह उनका सबसे विश्वास पात्र था। उसने नरेशा के साथ अपहरण और लूट की कई घटनाओं को अंजाम दिया। नौ फरवरी 2008 में बहनोई नरेशा पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इसके बाद पुलिस ने गैंग के ज्यादातर सदस्यों को पकड़ लिया। पुलिस ने उनके गैंग के ज्यादातर हथियार बरामद कर लिए थे। पुलिस से बचने के लिए जंटरू ने लूटी गई एक रिवाल्वर और एक रायफल को बरेली के थाना बहेड़ी क्षेत्र के गांव पचपेड़ा निवासी बहनोई नरेशा के रिश्तेदार रामदास कश्यप को दे दिया था। इसके बाद वह अपनी जान बचाने के लिए हरियाणा चला गया। हरियाणा के जिला गुड़गांव के थाना कटौती क्षेत्र के गांव मिरजापुर में एक कृषक के खेतों में मजदूरी करने लगा था।
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मुठभेड़ करने वाली टीम सम्मानित
एसपी आरपीएस यादव ने जंटरू को मुठभेड़ में पकड़ने वाली टीम में थाना मदनापुर एसओ आरपी सिंह, एसआई अशोक कुमार पाल, हेड कांस्टेबल मुन्नालाल, सिपाही नरेंद्र कुमार, रविंद्र यादव, अजय पाल और पन्नूलाल को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।