राजीव वाल्मीकि उर्फ राजू की हत्या के पीछे नगर निगम में चल रहा तेल का खेल है। किला गैराज के सुपरवाइजर पद से तीन महीने पहले राजू को हटा दिया गया था। सफाई नायक संजीव इस कुर्सी को हथियाना चाहता था लेकिन राजू की वजह से यह कुर्सी नहीं मिली और हरिओम को इंचार्ज बना दिया गया। शुक्रवार की शाम हरिओम को भी हटाकर आसिफ खां को इंचार्ज बना दिया गया। इसके पीछे भी राजू का दखल माना जा रहा था। कुर्सी जाने से नाराज हरिओम और संजीव ने राजू की हत्या का तानाबाना बुन लिया और शहनाई बारातघर में मौका मिलते ही मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि किला गैराज से लाखों के वारे न्यारे होते हैं।
राजीव और संजीव में तो तीन बार निगम में ही झगड़ा हुआ। यह लड़ाई सीधे- सीधे सुपरवाइजर पद, डीजल पेट्रोल का पैसा और सूदखोरी का बताया जा रहा है। शनिवार को नगर निगम में दिन भर इसी कांड को लेकर चर्चा चलती रही। राजीव के भाई राजकिरन ने बताया कि नौ सितंबर 2014 को निगम में पहली बार संजीव से उसकी बहस हुई थी, जिसके बाद से राजीव और संजीव में झगड़ा शुरू हो गया। सुपरवाइजर की मलाईदार कुर्सी की चाहत ने वर्चस्व की लड़ाई छेड़ दी। आखिर में संजीव ने राजीव को मौत के घाट उतार दिया। निगम के अधिकारी बताते हैं कि यह आपसी पुरानी रंजिश है, इसका गैराज या निगम से कोई मतलब नहीं।
इस तरह तेल में होता है खेल
इस वित्तीय वर्ष में सफाई और तेल के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसमें पांच करोड़ रुपये तेल पर खर्च होने के लिए रखे गए हैं। करीब चार करोड़ तेल पर सलाना खर्च हो ही जाते हैं। तमाम फर्जी पर्चियां भी जारी होती हैं और जिन गाड़ियों में तेल पड़ता भी नहीं वह भी निकाल लिया जाता है। तेल के खेल का पैसा कई जेबों में जाता है। जेसीबी को सबसे ज्यादा 50 लीटर तेल की पर्ची मिलती है। चैन एक्टीवेटर को 30, टैपों को 20 लीटर डीजल की पर्ची दी जाती है। इसमें से तेल पूरा लेने के बजाए निगम कर्मी खेल कर देते हैं। समाजवादी पार्टी पार्षद दल के नेता राजेश अग्रवाल का कहना है कि सीएनजी गाड़ी खरीदने के लिए बोर्ड के सामने प्रस्ताव रखा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सीएनजी की वाहन खरीदे जाने के बाद शहर को प्रदूषण से भी मुक्ति मिल जाएगी और तेल का खेल भी बंद होगा। नगर निगम के पास जेसीबी, चैन एक्टीवेटर, छोटा हाथी, टैंपो, टैक्टर-ट्राली और अफसरों की गाड़ियों समेत आदि 125 वाहन हैं।
हाजिरी से भी होती है कमाई
सभी गैराजों में सूदखोरी और कर्मचारियों के हाजिरी का भी बड़ा खेल चल रहा है। कई कर्मचारी ड्यूटी करने आते ही नहीं है। आधे-आधे में तय होने के बाद उनकी हाजिरी लगाने की गारंटी ले ली जाती है। इसी तरह गलत शोहबत में पड़े निगम कर्मचारियों को गैराज के सुपरवाइजर होने की वजह से दबाव में लेना भी आसान होता है। जरूरत पड़ने पर किसी कर्मचारी ने कर्ज लिया तो जिंदगी भर वह उतार नहीं पाता है। सूदखोरी का धंधा करने वाले सफाई नायकों को गैराज की कुर्सी हथियाने का लालच रहता है।
अनुकंपा पर मिली थी नौकरी
राजीव की नियुक्ति 2008 में अनुकंपा के आधार पर संविदा सफाई कर्मी के तौर पर हुई थी। राजू का छोटे भाई राज किशन का किला वाल्मीकि बस्ती में मेडिकल स्टोर है। पूर्व नगर आयुक्त वीके सिन्हा ने उसे सफाई नायक के पद पर प्रमोट करके किला गैराज का सुपरवाइजर बना दिया था। जबकि किसी भी संविदा कर्मी का प्रमोशन हो ही नहीं सकता है। इससे पहले राजू के पिता किशनलाल भी किला गैराज के कार्यवाहक सुपरवाइजर रहे हैं।
गैर कानूनी ढंग से प्रमोट हो गए 80 सफाई कर्मी
नगर निगम के 80 सफाई कर्मचारी कार्यवाहक सफाई नायक बनकर नगर निगम में मौज कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें मूल पद पर वापस करने की कोशिश की गई तो अफसरों की घेराबंदी करानी शुरू कर दी।
झगड़ा-1
करीब नौ महीने पहले का वाकया है। राजू और संजीव तत्कालीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके सिंधू के सामने उन्हीं के ऑफिस में मारपीट करने लगेे। दोनों ही दबंग किस्म के होने की वजह से नगर स्वास्थ्य अधिकारी पिछले दरवाजे के अपनी कुर्सी से उठकर निकल गए थे।
झगड़ा -2
पांच महीने पहले समाजवादी पार्टी का झंडा लगी स्कार्पियो लेकर सफाई नायक संजीव वाल्मीकि नगर निगम आया था। यहां उसका सिविल लाइंस और स्टोर गैराज के सुपरवाइजर हरिओम वाल्मीकि से विवाद हो गया था। मारपीट होने पर संजीव कार छोड़कर भाग गया था। मामला पुलिस तक पहुंच गया था। पुलिस ने दोनों को बैठाकर समझौता करा दिया था।
ये हैं शहर के गैराज
1-किला गैराज- यहां हरिओम वाल्मीकि को हटाकर नगर निगम के लिपिक आफिस खां की तैनाती हुई है
2-सिविल लाइंस, 3-स्टोरा गैराज- इन दोनों ही गैराजों के सुपरवाइजर हरिओम वाल्मीकि पहले से ही हैं। तीन महीने पहले किला गैराज का भी उन्हें अतिरिक्त चार्ज मिला था।
4-सीआई पार्क गैराज- यहां के सुपरवाइजर की जिम्मेदारी नाजिम हुसैन के पास है।
दो सफाई नायकों समेत छह नामजद
-तीन लोगों को पुलिस ने उठा लिया है
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। राजीव वाल्मीकि उर्फ राजू की हत्या में पुलिस ने बिहारीपुर निवासी सफाई नायक संजीव वाल्मीकि, उसके भाई रंजीत कुमार वाल्मीकि, सफाई नायक हरिओम वाल्मीकि के अलावा मनोज, कपिल और अंशु आर्य निवासी नेकपुर, थाना सुभाषनगर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हरिओम ने संजीव की बात होने के बाद राजू पर निगाह रखने के लिए अपना मुखबिर भेज दिया था। वह राजीव उर्फ राजू के घर से निकलने के बाद से ही वॉच कर रहा था। राजू और हरिओम आपस में रिश्तेदार हैं। संजीव को भी शादी में आना था। हरिओम और संजीव ने राजू को शादी हाल के बाहर ही मार डालने की प्लानिंग की थी, लेकिन वह जान बचाने के लिए अंदर भागा तो वहां दौड़ाकर उसे गोली मार दी। हत्यारोपी घरों में ताले लगाकर भाग गए हैं। दबिशें दी जा रही हैं, हत्यारोपियों की लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। सीओ सिद्धार्थ वर्मा बताया कि हत्यारोपियों की लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। कुछ रिश्तेदारों को थाने बुलाकर बैठा लिया है। हत्यारोपियों के पकड़ में आने पर सभी को घर भेज दिया जाएगा।