फतेहगंज गांव में घर के बाहर सो रहे 60 साल के बुजुर्ग किसान नरेश पाल की सगे भाई ने फावड़े से गर्दन काटकर हत्या कर दी और फरार हो गया। ग्यारह जुलाई को किसान के बेटे की शादी होने थी। हत्या से शादी के घर में मातम छाया हुआ है। पुलिस ने खून से सना फावड़ा मौके से ही बरामद कर लिया। हत्या की वजह का पुलिस अभी तक पता नहीं लगा पाई है। नरेश के बेटे की तहरीर पर सगे भाई धनपाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करके पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है। धनपाल एनडीपीएस एक्ट में जेल में बंद था। हाल ही में जेल से रिहा हुआ था।
ग्राम पंचायत इस्माइलपुर के मजरे फतेहगंज गांव निवासी 60 वर्षीय नरेश पाल शुक्रवार की रात घर के बाहर बने चबूतरे पर सो रहे थे। पास में ही उनका भाई धनपाल भी सोया था। नरेश के बेटे कल्यान ने बताया कि शनिवार को सुबह चार बजे उसके दूसरे चाचा अजयवीर सिंह ने चारपाई के नीचे खून देखा तो पिता की हत्या के बारे में जानकारी हुई। चारपाई पर पिता की गर्दन कटी हुई थी और वहीं फावड़ा पड़ा हुआ था। पड़ोस में सोया चाचा धनपाल भी गायब था। घटना की सूचना मिलते ही एसओ विजय प्रताप सिंह मौके पर पहुंच गए। छानबीन में पता लगा कि नरेश पाल और धनपाल में प्रॉपर्टी को लेकर भी विवाद चल रहा था।
शक के आधार पर मृतक के भाई धनपाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा लिखकर विवेचना कराई जा रहा है। विवेचना में जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। भाई पर शक इसलिए भी है कि वह नरेश पाल के बराबर में सोता था और घटना के बाद से गायब है। धनपाल के पकड़े जाने के बाद हत्या की वजह पता चलेगी-यमुना प्रसाद, एसपी देहात
जमींदार खानदान से थे नरेश पाल
दो दशक में रंजिशन चार हत्याएं हो चुकी हैं गांव में
बिशारतगंज। फावड़े से काटकर मार दिए गए नरेश पाल जमींदार खानदान से संबंध रखते थे। उनके पिता रामनाथ की पूरे इलाके में अच्छी पहचान थी। नरेश पाल के अलावा दो दशक में फतेहगंज गांव में चार हत्याएं हो चुकी हैं।
फतेहगंज गांव में पुरानी रंजिश को लेकर तीन हत्याएं हो चुकी हैं। इससे पहले प्रेमपाल,बालिस्टर सिंह व रेवती की रंजिशन हत्या कर दी गई। रामनाथ दो भाई थे। छोटे भाई रामगुलाब की शादी नहीं हुई थी। गांव में सौ बीघा से अधिक जमीन शानदार मकान के साथ उन्हें ननिहाल अलीगंज के किदौना गांव में भी तीस बीघा जमीन बाग व मकान आदि संपत्ति मिली थी। रामनाथ के तीन पुत्र नरेशपाल, अजय पाल एवं धनपाल थे। पिता की मौत के बाद नरेश पाल व उनके भाई पिता की विरासत को ठीक से नहीं संभाल सके और धीरे-धीरे जमीन बिक गई। बाकी संपत्ति भी नहीं बची। नरेश पाल के चार पुत्र कल्यान सिंह उर्फ कल्लू , लालू सिंह, नन्हे सिंह व आकाश सिंह एवं पांच पुत्रियां हुईं। अजय पाल व धनपाल अपना परिवार नहीं बसा पाए। धनपाल के खिलाफ आंवला थाने में हत्या का प्रयास का मामला करीब डेढ़ दशक पहले दर्ज हुआ था। जमानत पर रिहा होने के बाद धनपाल न्यायालय में तारीख पर नहीं गया न ही गांव में आया। न्यायालय से उसके खिलाफ दस वारंट जारी हुए। धनपाल के न मिलने पर पुलिस नरेश पाल को परेशान करती थी। इस पर नरेश पाल ने अपने बहनोई की मदद से धनपाल को खोज कर पुलिस को सौंप दिया था। जिसके बाद धनपाल कई वर्ष जेल में रहा। इसके बाद वह एनडीपीएस एक्स में बंद हो गया था।
शादी वाले घर में मचा कोहराम
आंवला। जिस घर में ढोलक की थापों पर मंगल गीत गाकर बहने भाभी के घर आने का इंतजार कर रही थीं, मां भी बेटे के सेहरे को देखने के लिए मेहमानों की सूची बनाने में व्यस्त थीं। शनिवार को नरेशपाल की मौत होने के बाद परिवार में शादी की खुशियां मातम में बदल गई। मृतक नरेश पाल के बडे़ बेटे पुष्पेंद्र सिंह की शादी बिशारतगंज के गांव राजपुर से तय हुई थी। 11 जुलाई को बारात जानी थी। भाई अजयवीर ने बताया शुक्रवार को शादी के कार्ड बांटकर नरेश पाल लौटे थे। देर रात तक उन्होंने शादी के बारे में परिवार वालों के साथ बैठकर बात की।