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आईवीआरआई में एक और वैज्ञानिक को मिली धमकी से दहशत

Mon, 25 Apr 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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आईवीआरआई में एक और वैज्ञानिक को धमकी मिलने से दहशत है। आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह ने अपनी जान को खतरा बताते हुए डीएम, एसएसपी और संस्थान के निदेशक को पत्र लिखा है। वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह की ओर से परिवार को जान का खतरा बनाने के बाद वैज्ञानिक बहुत डर गए हैं। उन्हें लग रहा है कि कहीं फिर कोई वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की तरह निशाना न बन जाए। इसलिए, तुरंत कार्रवाई कराने में लगे हुए हैं। 
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आईवीआरआई के महामारी विभाग के अध्यक्ष प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह ने लिखा है कि सीसीएस एनआईएच बागपत के निदेशक के अतिरिक्त चार्ज के दौरान उन्होंने पशुओं की वैक्सीन बनाने वाली एक कंपनी की वैक्सीन की जांच की थी। जांच में वैक्सीन मानक के मुताबिक नहीं निकली। वैक्सीन की गुणवत्ता ठीक नहीं थी, इसलिए उन्होंने रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही दवा कंपनी और संस्थान के कुछ लोग उनके नाराज हो गए। अब ये लोग उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। कंपनी ने उनके ऊपर मानहानि का मुकदमा भी दर्ज करा दिया है। 
डॉ. भोजराज ने लिखा है कि कंपनी के जो वैक्सीन जांच में स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं मिली है थी, उसी कंपनी की वैैक्सीन पशुओं को लगाई गई थी। इसके बाद ही आईवीआरआई के जानवरों को खुरपका-मुंहपका फैल गया। वह इसके खिलाफ बोले भी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब उन्हें ही धमकियां दी जा रही हैं। उनके घर के लोग बहुत तनाव और दहशत में हैं। यही नहीं, आईवीआरआई के वैज्ञानिक भी बहुत डर गए हैं। इसके लिए उन्होंने एसएसपी और डीएम को मेल करने के साथ ही शिकायती पत्र भी रिसीव कराया है।  
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मैंने शहर से बाहर हूं। मैंने शिकायती पत्र पढ़ा नहीं है। मैं आईवीआरआई पहुंचकर देखूंगा। शिकायत आई होगी तो आईसीएआर भेज दी गई होगी। 
डॉ. आरके सिंह, निदेशक, आईवीआरआई

वैक्सीन टेस्टिंग में पहले भी वैज्ञानिकों पर बनाया गया दबाव
आईवीआरआई में वैक्सीन टेस्टिंग में पहले भी कई वैज्ञानिकों को दबाव बनाया गया। दरअसल, प्राइवेट कंपनियां अपनी वैक्सीन को पास कराने के लिए काफी दबाव बनाती हैं। उन्हें लगता है कि अगर वैक्सीन फेल होगी तो फिर उनका नुकसान हो जाएगा, लेकिन जान से मारने की धमकी की शिकायत किसी ने नहीं की। वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह ने पहली बार जान से मारने की धमकी की शिकायत की है। 
आईवीआरआई में वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की हत्या के बाद से वैज्ञानिक ज्यादा डर गए हैं। उन्हें लग रहा है कि कोई भी उन्हें धमकी देने के बाद मारकर चला जाएगा और कोई सुनवाई नहीं होगी। इसलिए, हर धमकी और दबाव में वैज्ञानिक डर जाते हैं। आईवीआरआई में हुई एक हत्या ने वैज्ञानिकों को बहुत डरा दिया है। आईवीआरआई में वैक्सीन टेस्टिंग के लिए आती रहती हैं। एक कंपनी चाहती है कि वैक्सीन पर कोई सवाल न खड़ा किया जाए, लेकिन जब उन्हें लगता है कि उनकी वैक्सीन में कमी निकलेगी तो वैज्ञानिकों पर उसे पास करने का दबाव बनाते हैं। कई बार वैज्ञानिकों से कंपनी वाले उलझ भी जाते हैं। 

2012 से पहले आईवीआरआई में भी बनती थी वैक्सीन
ड्रग कंट्रोल ऑफ इंडिया से मानक सख्त होने के बाद लगी रोक
2012 से पहले आईवीआरआई में वैक्सीन बनती थी। लेकिन, ड्रग कंट्रोल ऑफ इंडिया की ओर से मानक सख्त होने के बाद आईवीआरआई में वैक्सीन प्रोडक्शन पर रोक लग गई। ड्रग कंट्रोल ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट दी कि आईवीआरआई में वैक्सीन प्रोडक्शन मानक के अनुरूप नहीं है। आईवीआरआई में लगभग 15 तरह की वैक्सीन बनती थीं। 2012 से पहले काफी संख्या में वैक्सीन बनाकर देशभर में सप्लाई होती थी, लेकिन ड्रग कंट्रोल ऑफ इंडिया की ओर से आईवीआरआई में वैक्सीन प्रोडक्शन को मानक के विपरीत बताकर बंद करा दिया गया। सूत्रों की मानें तो इस मामले में भी वैक्सीन प्रोडक्शन की कंपनियोें की बात सुनी गईं और आईवीआरआई में प्रोडक्शन बंद कराया गया। आईवीआरआई को मिले निर्देशों के तहत उसने मानक पूरे करने के लिए अलग बिल्डिंग बनाएगा। इसके लिए बजट पास हो गया है। बिल्डिंग बनाने में दो साल का समय लगेगा। इसके बाद ही वैक्सीन प्रोडक्शन शुरू हो पाएगा। इससे समझा जा सकता है कि वैक्सीन प्रोडक्शन करने वाली निजी कंपनियों के हाथ बहुत लंबे हैं। वह अपनी वैक्सीन को सही ठहराने के लिए वैज्ञानिकों को धमकी भी दे सकती हैं और सरकार पर भी दबाव बना सकती हैं। 
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