भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के जेनेटिक विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा हत्याकांड में पुलिस की छानबीन विजिलेंस जांच पर आकर अटक गई है। एसपी सिटी रोहित सिंह सजवाण प्रधान वैज्ञानिक के खिलाफ हुई विजिलेंस जांच की फाइल में हत्या का सुराग तलाश रहे हैं। संस्थान स्थित परिसर में प्रधान वैज्ञानिक के आवास पर एसपी सिटी ने क्राइम सीन समझने की कोशिश भी की।
विवेचक इंस्पेक्टर नरेश त्यागी के मुताबिक, 2013 में विजिलेंस जांच में आईवीआरआई में प्रो. एमसी शर्मा के निदेशक रहते तमाम गड़बड़ियां सामने आई थीं। तभी डॉ. दीपक के विभागाध्यक्ष रहते हुए पशु जेनेटिक विभाग में खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी की भी विजिलेंस जांच हुई थी। मामले में वह दोषी पाए गए थे और उनके समेत 14 लोगों पर जुर्माना लगा था।
हार्ड डिस्क और मोबाइल से नहीं हुआ डाटा रिकवर
बीती 28 जुलाई, 2015 की रात कातिलों ने वैज्ञानिक के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को शार्ट करडाटा मिटाने की कोशिश की, मोबाइल सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तोड़ दिए थे। शायद वह कुछ ढूंढ रहे थे जो उन्हें नहीं मिला। पुलिस ने हार्ड डिस्क और मोबाइल मुरादाबाद की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में डाटा रिकवर करने के लिए भेजी, लेकिन डाटा सामने नहीं आया था।
125 फिंगर प्रिंट में एक का भी मिलान नहीं
केस की सबसे अहम कड़ी थी कि कातिल उनका परिचित था और परिसर में आता-जाता रहता था। पुलिस ने घर से मिले फिंगर प्रिंट का मिलान करने के लिए परिवार, रिश्तेदार, आईवीआरआई के जेनेटिक विभाग सहित अन्य विभागों से करीब 125 लोगों के फिंगर प्रिंट लिए थे। नवंबर, 2016 में आई रिपोर्ट में एक भी फिंगर प्रिंट नहीं मिला था।
तफ्तीश कर रहा हूं। विजिलेंस जांच के दस्तावेज मंगवाए हैं। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि वैज्ञानिक की हत्या इन्हीं कारणों से हुई हो। - रोहित सिंह सजवाण, एसपी सिटी