बारादरी की क्रिस्टल कॉलोनी से एक करोड़ रुपये ठग कर फरार हुई कंपनी रियल इंडिया ने भी बिट क्वाइन की तर्ज पर क्रिप्टो करेंसी लांच की थी। इसमें भी लोगों से काफी निवेश कराया गया। इस कंपनी ने बरेली और पीलीभीत के करीब 500 लोगों को एक करोड़ रुपये का चूना लगाया है।
श्रीगंगा इन्फ्रासिटी के बाद अब एक और ठग कंपनी रियल इंडिया ग्रुप गायब हो गई है। बारादरी की क्रिस्टल कॉलोनी निवासी विजय प्रताप सिंह ने पीलीभीत के थाना सुनगढ़ी में इसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इस रिपोर्ट में आलमबाग (लखनऊ) के गीतापल्ली निवासी सोमनाथ अग्रहरि, संतप्रसाद मिश्रा उर्फ एसपी मिश्रा जोनल मैनेजर कोतवाली, रामपुर के सफाखाना निवासी प्रदीप गुप्ता, उनकी पत्नी ज्योति गुप्ता, जलालाबाद (शाहजहांपुर) के गुनारा गांव निवासी सुष्मिता सक्सेना, आलमबाग (लखनऊ) के प्रेमनगर निवासी पंकज श्रीवास्तव, सिविल लाइंस नार्थ पीलीभीत मरौरी ब्लॉक के पीछे के निवासी प्रतीक मिश्रा, एलडीए कॉलोनी (कानपुर) के नितिन श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। विजय के मुताबिक, सात दिसंबर, 2015 को उनके मकान के निचले हिस्से में कंपनी का ब्रांच ऑफिस बनाया गया था। वह भी इसके एजेंट बने और लोगों से निवेश कराया। अब यह कंपनी फरार हो गई है। इस कंपनी ने लोगों से मोटा ब्याज और क्रिप्टो करेंसी में निवेश कराया था।
गुजरात से हैं वारंट, लखनऊ में धंधा
इस मामले में पीलीभीत में दर्ज मुकदमे के कुछ आरोपी गुजरात से फरार चल रहे हैं। वहां से उनके खिलाफ वारंट भी जारी किए गए हैं। मगर अब यह कंपनी नाम बदलकर लखनऊ में कारोबार कर रही है।
श्रीगंगा इन्फ्रासिटी के अब तक बीस एकाउंट फ्रीज
बरेली। निवेशकों के 200 करोड़ रुपये ठगकर फरार होने वाली श्रीगंगा इन्फ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड के पांच और खाते सामने आए हैं। पुलिस ने इन्हें भी फ्रीज करा दिया है। कंपनी के अब तक 20 खातों को पुलिस फ्रीज करा चुकी है लेकिन इनमें से किसी भी खाते में ज्यादा रकम नहीं है। कंपनी भागने से पहले ही सारे खाते खाली कर गई। थाना बारादरी में श्रीगंगा इन्फ्रासिटी के एमडी चंद्रगुप्तपुरम कॉलोनी निवासी राजेश मौर्य, एजेंट अजय मौर्य, मनोज मौर्य, दिनेश मौर्य, सिविल लांइस में वसुंधरा होटल के पीछे रहने वाले विश्वनाथ मौर्य, कृष्णनाथ मौर्य, शिवनाथ मौर्य और संदीप सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। ये आरोपी मोटे ब्याज और जमीन में निवेश का लालच देकर लंबे समय तक लोगों से निवेश कराते रहे। क्रिप्टोकरेंसी भी शुरू की गई और फिर हजारों लोगों को करीब 200 करोड़ रुपये का चूना लाकर फरार हो गए। मंत्री से लेकर अधिकारी, व्यापारी और विभिन्न वर्ग के लोग इनके जाल में फंसे। कालेधन का इसमें जमकर निवेश किया गया। अब इनके फरार होने के बाद ठगी के शिकार सामने आ रहे हैं। इस मामले में पुलिस 15 बैंक अकाउंट पहले ही फ्रीज करा चुकी थी। वहीं अब पांच अन्य बैंक खाते और फ्रीज कराए गए हैं।