बड़े ही शातिर हैं ये जालसाज, जरा सा चूके नहीं कि ये आपको ठग लेंगे। ठगी के तरीके भी अलग-अलग हैं। कभी रकम दोगुनी करने का झांसा देते हैं तो कभी नौकरी का। फंसाने के लिए फर्जी ऑफर लेटर और दस्तावेज तक भेज देते हैं। महिलाओं के जेवर हड़पने के लिए उन्हें परेशानी से निजात दिलाने का दावा करते हैं तो कभी रास्ता रोककर आगे चेकिंग की बात कहते हैं। झांसे में आईं तो जेवर गायब। अब तो साइबर ठगी के मामले भी खूब सामने आ रहे हैं। फोन करके खाता या एटीएम ब्लाक होने की बात कहते हैं, कार्ड, सीवीसी और पिन नंबर की जानकारी करते हैं और कुछ देर बाद अकाउंट से रुपये निकल जाने का मैसेज आ जाता है। विदेशी महिलाओं के नाम पर सोशल मीडिया पर आईडी बनाकर भी रकम हड़प ली जाती है। यही नहीं, मोबाइल टावर लगवाने का विज्ञापन निकालकर दावेदारों को चूना लगाते हैं। ठगी के ऐसे मामलों का बरेली गढ़ बनता जा रहा है। थानों में ऐसे मामलों की बाढ़ सी आ रखी है। पुलिस की छानबीन में कुछ गिरोह का पर्दाफाश भी होता है, लेकिन अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा नहीं गंवाना है तो आपको भी सावधानी बरतनी होगी।
मोबाइल टॉवर लगवाने का झांसा
अखबारों में मोबाइल टॉवर लगवाने का विज्ञापन दिया जाता है, जिसमें मोबाइल नंबर भी अंकित होता है। किराए के रूप में मोटी रकम देने का दावा किया जाता है। लोग संपर्क करते हैं तो रजिस्ट्रेशन शुल्क या अन्य मदों का झांसा देकर 60 से 70 हजार रुपये जमा कराने को कहा जाता है। फर्जी एग्रीमेंट भी भेज दिया जाता है। बैंकों में फर्जी आईडी पर खुले खाते में रुपये जमा करवा लेते हैं।
एटीएम ब्लॉक बताकर करते हैं गुमराह
लोगों को फोन करके एटीएम और बैंक खाता ब्लॉक होने की बात कहकर गुमराह करते हैं। एटीएम कार्ड के आखिरी चार अंक और पिन नंबर पूछकर खाते से ऑनलाइन खरीद करते हैं। मोबाइल नंबर पर अलर्ट मैसेज के जरिये रुपये निकलने की जानकारी लोगों को मिल पाती है।
मोबाइल का आर्डर और मूर्ति का पार्सल
महंगे ब्रांडेड मोबाइल को सस्ती कीमत पर देने का दावा करने वाला विज्ञापन निकलवाते हैं। ठग खाता नंबर देकर लोगों से रुपये जमा करवाते और पार्सल भेजते हैं। घर पर पहुंचे पार्सल को जब ग्राहक खोलता है तो उसमें मूर्ति और श्रीयंत्र निकलता है।
जेवर रुमाल में बांधे, बाद में खोला तो कागज निकले
गिरोह रोड पर पता पूछने का झांसा देकर रोक लेता है। कभी चेकिंग का डर दिखाकर तो कभी परेशानी से निजात का झांसा देकर महिलाओं से जेवर रुमाल में बांधकर उन्हें सौंपने को कहता है। बाद में ठग रुमाल की पोटली वापस करते हैं। जब लोग बाद में इसे खोलते हैं तो रद्दी कागज निकलते हैं।
कंपनी में हिस्सेदारी का लालच देकर हड़पते हैं लाखों
कंपनी सिक्योरिटी मनी लेने के बाद लोगों को रॉ मैटेरियल उपलब्ध करवाकर मोतियों की माला बनवाती है। फिर ग्राहकों को कंपनी में निवेश करने पर हिस्सेदार बनाने का लालच दिया जाता है। लाखों रुपये निवेश होने पर कंपनी कार्यालय बंद करके भाग निकलती है।
सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी का रैकेट
अखबार, ऑनलाइन सहित व्यक्तिगत संपर्क करके ठग रेलवे, मर्चेंट नेवी एवं अन्य सरकारी विभागों में मोटे वेतन पर नौकरी लगवाने का झांसा देते हैं। इसके एवज में लाखों रुपये ले लिए जाते हैं। ठग फर्जी ऑफर लेटर सहित अन्य दस्तावेज तक मुहैया करवाते हैं।
कबूतरबाजों के चंगुल में फंसकर गवां बैठते हैं पूंजी
विदेशों में नौकरी का झांसा देकर लोगों से वीजा और पासपोर्ट बनवाने के लिए लाखों रुपये लिए जाते हैं। लोगों को सउदी और दुबई भेज भी देते हैं, लेकिन वहां नौकरी नहीं मिलने पर लोग भटकते रहते हैं। कई युवक तो बंधुआ मजदूर बनकर रह जाते हैं।
रुपये दोगुना करने का दावा करती हैं ठग कंपनियां
व्यस्त बाजार में छोटे कार्यालय खोलकर लोगों को झांसा दिया जाता है कि तीन या पांच साल में रुपये दोगुना कर दिया जाएगा। लोगों से निवेश करवाने के बाद कंपनी अपना दफ्तर बंद करके भाग निकलती है। लोगों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध करवाए जाते हैं।
विदेशी महिलाओं की आईडी से लगाते हैं चूना
सोशल साइट्स और ईमेल पर विदेशी महिलाओं की आईडी से मैसेज भेजकर दोस्ती की जाती है। झांसे में आए व्यक्ति को उसके खाते में मोटी रकम जमा करवाने का लालच दिया जाता है। फिर ट्रांजेक्शन चार्ज और आयकर के नाम पर रुपये ठग अपने खाते में जमा करवा लेता है और बाद में आईडी ब्लॉक हो जाती है।
जानकारी ही बचाव है। ठग लोगों को कई तरह के झांसों के जरिये चूना लगाते हैं। अगर ठगी हो भी जाए तो जितनी जल्दी हो सके, संबंधित थाने और अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज करवानी चाहिए। पुलिस ने कई गिरोह पकड़कर सलाखों के पीछे पहुंचाए हैं।
- रमेश भारतीय, एसपी क्राइम