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पुलिस और डॉक्टरों ने की गैंगरेप पीड़ित की बेकदरी

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फोटो- 41, 42
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तड़पती रही गैंगरेप पीड़ित, नहीं पसीजे डॉक्टर...
महिला अस्पताल में कागज नहीं पहुंचे तो नहीं शुरू किया इलाज
दिन भर इधर से उधर किया रेफर, अफसर आए तो मिला उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था की संवेदनहीन तस्वीर शुक्रवार को सामने आई। बेहोशी की हालत में दर्द से कराहती गैंगरेप पीड़ित का तुरंत इलाज शुरू करने में इसलिए आनाकानी होती रही कि मेडिकोलीगल कार्रवाई को पुलिस के कागजात नहीं आए थे। महिला अस्पताल में इसे लेकर लगभग दो घंटे हंगामा भी हुआ।
महिला के साथ हुई घटना के बाद परिवार के लोग उसे बेहोश हालत में ही उझानी सीएचसी लेकर पहुंचे। सीएचसी पर मौजूद डॉ. आरके गंगवार ने उसे एक इंजेक्शन लगाया और गंभीर मामला बताते हुए तत्काल बदायूं महिला अस्पताल रेफर कर दिया। इस दौरान पुलिस कहीं साथ नहीं थी। यहां बारह बजे महिला को भर्ती कराया गया तो इमरजेंसी में डॉ. शोभा अग्रवाल और मेडिकोलीगल के लिए डॉ. रश्मिदीप की ड्यूटी थी। दोनों ने ही महिला का मेडिकोलीगल करने से यह कहकर मना कर दिया कि इस संबंध में पुलिस का कोई कागज नहीं है। तब पीड़ित परिवार के साथ आए भाजपा नेता मनीष माहेश्वरी और कासगंज भाजपा के मछुआरा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कश्यप ने डॉक्टरों ने अनुरोध किया कि वे कम से कम उपचार तो शुरू करें, बाकी कागजी खानापूरी वह करा देंगे। बावजूद डॉक्टरों ने अड़ियल रवैया जारी रखा। बस महिला को ऑक्सीजन लगाकर छोड़ दिया और डॉक्टर निकल गईं। एसएसपी से शिकायत की गई तो सदर कोतवाल अजय यादव और कछला प्रभारी प्रमोद कुमार मौके पर आ गए। उन्होंने कहा कि पुलिस के कछला जाम खुलवाने में लगे होने की वजह से देर हो गई। इंस्पेक्टर यादव ने कहा कि अगर उझानी पुलिस मौजूद नहीं है तो कागजी औपचारिकता वह पूरी कर देंगे, इलाज शुरू किया जाए। बावजूद काफी देर तक डॉक्टर ही नहीं आईं।
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थोड़ी देर बाद एसपी सिटी कमल किशोर और उझानी सीओ भूषण वर्मा भी मौके पर आ गए। तय हुआ कि पहले महिला की बाहरी चोटों का मुआयना और इलाज जरूरी है, मेडिकोलीगल बाद में हो जाएगा। तब महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. नितिन सिंह ने उसकी बाह्य चोटों का मेडिकल किया। बाद में महिला अस्पताल ले जाकर आंतरिक परीक्षण कराया गया। महिला को फिर जिला अस्पताल लाया गया और यहां से बरेली रेफर कर दिया गया।
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भाजपा नेताओं से डॉक्टर की तकरार
महिला अस्पताल में डॉ. शोभा अग्रवाल से भाजपा नेता मनीष माहेश्वरी और शैलेंद्र कश्यप की तीखी तकरार हुई। डॉक्टर और स्टाफ की उदासीनता से गुस्साए नेताओं ने सीएम कार्यालय में फोन करके बदायूं की घटना से अवगत करा दिया, बाद में एसपी सिटी पहुंचे तो महिला को रेफर किया गया। भाजपा नेताओं से डॉक्टर की तकरार हुई। तब मनीष ने डीएम को कॉल की जो रिसीव नहीं हुई। दोनों नेताओं ने कहा कि गंभीर हालत के बाद भी महिला उत्पीड़न के मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही। अस्पताल के अधिकारी प्रदेश सरकार की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, वह जिलाध्यक्ष के माध्यम से उच्च स्तर तक लिखित शिकायत करेंगे।
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गैंगरेप की प्रारंभिक पुष्टि नहीं, बेहोशी सदमे से
बदायूं। जिला अस्पताल में महिला की बाह्य चोटों का मुआयना हुआ तो पूरे शरीर पर चोट का कोई ताजा निशान नहीं मिला। केवल एक खरोंच का निशान मिला जो नाभि से प्राइवेट पार्ट तक था। सूत्रों के मुताबिक आंतरिक मुआयने में भी गैंगरेप की प्रारंभिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि बरेली रेफर होने तक महिला बेहोशी की हालत में थी। डॉक्टरों ने इसकी वजह सदमा माना है।
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वर्जन
मेडिकोलीगल बिना पुलिस के कागजातों के संभव नहीं था, बावजूद डॉक्टर का पहला दायित्व मरीज की जान बचाना होता है। इस मामले में लापरवाही बरती गई है तो दोषियों पर कार्रवाई जरूर होगी। जिला महिला अस्पताल के स्टाफ की भूमिका की जांच कराई जाएगी। सामान्य तौर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं पर रेप होने या न की पुष्टि तो स्लाइड के नमूने की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
- डॉ. नेमीचंद्रा, सीएमओ
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पुलिस मारपीट मानकर कर रही जांच
बदायूं। गैंगरेप की आशंका से इतर पुलिस मामले को मारपीट का मानकर जांच कर रही है। एसपी सिटी कमल किशोर ने बताया कि पीड़ित पक्ष की कोई तहरीर अभी पुलिस को नहीं मिली है। तहरीर होती तो उसके हिसाब से रिपोर्ट करके जांच करते। महिला के होश में आने पर कुछ हकीकत पता लगेगी। मेडिकोलीगल में गैंगरेप जैसी स्थिति नहीं आई है। लग रहा है कि कुछ लोगों ने महिला को घेरकर मारपीट की है जिससे वह बेहद डर गई है। पुलिस अपनी ओर से जांच कर हकीकत पता करने में जुटी है।
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पंखिया गिरोह पर शक जताया
बदायूं। घटनास्थल के पास पंखिया नगला के गिरोह दूसरे प्रांतों में भी बड़ी वारदात करने को मशहूर हैं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग चर्चा कर रहे थे कि लूट, डकैती, हत्या करने वाले पंखिया गैंग ने तो यह कृत्य नहीं किया। इनका सरगना अजमेर इन दिनों जेल से जमानत पर आया हुआ है जो घटना के बाद से दिखाई नहीं दे रहा। वहीं, महिला के पति ने एक साल पहले अपने परिवार के ही लोगों से जमीन के पीछे विवाद की बात बताई। हालांकि यह भी कहा कि जब तक उनकी पत्नी होश में आकर कुछ नहीं बताती, वह किसी के खिलाफ रिपोर्ट नहीं कराएंगे।
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