युवक की मौत के बाद फर्जीवाड़ा कर बीमा कराने और क्लेम हासिल करने की कोशिश में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया तो चौंकाने वाली कहानी सामने आई। दोनों आरोपियों ने दो युवकों की मौत के बाद उनके 13 बीमा कराए थे और करीब तीन करोड़ रुपये का क्लेम हड़पने की तैयारी में थे। इसी बीच एक बीमा कंपनी ने रिपोर्ट दर्ज करा दी तो मामला खुल गया। पुलिस ने इस मामले में एक मृतक की मां, बीमा कराने वाले दो एडवाइजर और फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने वाले ठिरिया नगर पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी को भी आरोपी बनाया है।
रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव टेरिटरी मैनेजर अमित सक्सेना ने 22 जुलाई को ठिरिया निजावत खां निवासी शहनाज के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसने फर्जीवाड़ा कर अपने बेटे शोएब खां की मौत के बाद 25 लाख रुपये के दो बीमा कराए। एक अन्य बीमा एलआईसी से 9.90 लाख रुपये का कराया गया। इनसे 19.90 लाख रुपये का क्लेम प्राप्त भी कर लिया था। विवेचना एसआई प्रीति पवार को दी गई। सीओ सिटी कुलदीप कुमार ने बताया कि विवेचना के दौरान नरियावल निवासी साकिब और ठिरिया निवासी शकील उर्फ बबलू को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में चौंकाने वाली कहानी सामने आई। शोएब की मौत जनवरी, 2016 में बहेड़ी स्थित ननिहाल में हुई। मगर उसकी मौत 25 अप्रैल, 2016 को ठिरिया में होना बताकर बीमा का राशि हासिल करने के लिए क्लेम किया गया। वह बीए प्रथम वर्ष तक पढ़ा था, मगर उसे हाईस्कूल बताया गया। वह अक्सर बीमार भी रहता था, फिर भी फर्जीवाड़ा कर मौत के बाद बीमा करा दिया गया।
नगर पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी भी बने आरोपी
इस मामले में पुलिस में शोएब की मां के अलावा बीमा के लिए उसकी पॉलिसी अप्रूव करने वाले एडवाइजर भमोरा निवासी शेर बहादुर और बदायूं में बिल्सी निवासी जितेंद्र को आरोपी बनाया है। इसके अलावा गलत तिथि पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले ठिरिया नगर पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी भी आरोपी बनाए गए हैं।
ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ऐसे युवाओं पर नजर रखते थे, जिनकी बीमारी के कारण घर में मौत हुई हो और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी न हुआ हो। इसके बाद बीमा कंपनियों के कर्मचारियों से साठगांठ कर उनका बीमा करा लेते थे और फिर बीमा की तारीख के कुछ महीने बाद का मृत्यु प्रमाण बनवाकर क्लेम के लिए आवेदन करते थे। मगर शोएब के मामले में आरोपियों ने नॉमिनी और उसके चाचा के रूप में अपना ही मोबाइल नंबर दर्ज करा दिया। इससे वे पकड़े गए।
फर्जीवाड़ा कर बना लिया होटल, फैक्ट्री
आरोपियों ने इस तरह से फर्जीवाड़ा करके लंबी कमाई की है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने पीलीभीत बाईपास पर एक होटल बना रखा है और एक स्टील फैक्ट्री भी है। माना जा रहा है कि वे पहले भी ऐसे मामले को अंजाम दे चुके हैं।
अभी दर्ज होंगे 10 से अधिक मुकदमे
कोतवाली इंस्पेक्टर गीतेश कपिल ने बताया कि शोएब के अलावा आरोपियों ने ठिरिया निजावत खां के ही रहने वाले शोहाब अली खां के भी 10 बीमा कराए थे। करीब ढाई करोड़ रुपये कवर राशि के ये 10 बीमा पंजाब नेशनल बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई प्रू, ऐगॉन, आईसीआईसीआई प्रूडेंसियल, रिलायंय आदि कंपनियों से कराए थे। आरोपियों ने शोहाब की मौत 13 दिसंबर, 2015 को करंट लगने से मौत होने की बात कहते हुए क्लेम कर दिया। मगर यह मामला पकड़ में आने के बाद अब ये कंपनियां भी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएंगी।