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रामगंगा किनारे जुआ का बड़ा फड़ पकड़ा, चार जुआरी दबोचे

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बरेली। क्राइम ब्रांच की टीम ने बिशारतगंज पुलिस की मदद से गुरुवार शाम रामगंगा नदी किनारे खजुआई के खेतों में चल रहे जुए के बड़े फड़ पर छापा मारा। टीम ने यहां से चार जुआरियों को पकड़कर करीब 35 हजार रुपये बरामद कर लिए। हालांकि ठेके पर जुआ कराने वाले माफिया समेत करीब 15 जुआरी भाग निकले। कई बाइक और मोबाइल बरामद करने की सूचना है। पुलिस शुक्रवार को इसका खुलासा कर सकती है।
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रामगंगा किनारे गांवों में जुआ के बड़े फड़ लगने की सूचना अधिकारियों को लगातार मिल रही थी। कहा जा रहा था कि स्थानीय हलका पुलिस के बजाय क्राइम ब्रांच से कार्रवाई कराई जाए तो बड़ा जुआ पकड़ा जा सकता है। अधिकारियों ने निगरानी बढ़ाई तो जुआ कराने वालों को शक हो गया। वे ठिकाना बदलने की फिराक में थे। तभी गुरुवार शाम छह बजे क्राइम ब्रांच की टीम ने बिशारतगंज इंस्पेक्टर के साथ मिलकर जुआरियों को घेर लिया। कई जुआरी तो नदी की ओर तो कई गांव में भाड़ पड़े। बताते हैं कि चार जुआरी पकड़ में आ सके जिनसे करीब 35 हजार रुपये ही मिल सके। कई मोबाइल और बाइक बरामद की गईं।

बीस फीसदी तत्काल ब्याज पर कराते हैं जुआ
गांव का एक ठेकेदार स्थानीय जनप्रतिनिधि की शह पर रामगंगा किनारे ताश के पत्तोा से जुआ कराता है। अक्सर खेत बदलकर फड़ लगाए जाते हैं। दूरदराज के गांवों से जुआरी यहां आते हैं। पुलिस विभाग के ही पास सूचना है कि रोज करीब तीन से पांच लाख रुपये तक के दांव यहां लगते हैं। ठेकेदार जुआरियों को रकम उपलब्ध कराता है। हारे जुआरी को तय अवधि में रकम देनी होती है। उससे मूल रकम या नाममात्र का ब्याज लिया जाता है पर जु जीतने वाले से दस से बीस फीसदी तक रकम तत्काल ही वसूल ली जाती है। इस तरह ठेकेदार दिन में पचास हजार या उससे ज्यादा तक कमाई कर लेता है। इसके बदले में जुआरियों को कई सुविधाएं दी जाती हैं। उन्हें थोड़ी थोड़ी देर पर चाय, नाश्ता, सिगरेट आदि उपलब्ध कराई जाती है। स्थानीय पुलिस के कार्रवाई न करने की गारंटी भी इसमें शामिल होती है। देर रात शराब और खाने की व्यवस्था भी ठेकेदार जीते हुए जुआरियों की मदद से करता है।
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ज्यादा रकम पकड़ने की चर्चा
क्राइम ब्रांच न लगती तो जुआ पकड़ना संभव नहीं होता। हर बार की तरह इस बार भी आरोप लगा कि करीब एक लाख से ज्यादा रकम बरामद हुई है। हालांकि पुलिस ने इससे इंकार किया। पुलिस यहीं पर और बड़ा फड़ पकड़ने की कोशिश में थी पर ठेकेदार को शक होने के कारण जगह बदलने की तैयारी हो गई थी। इसलिए तत्काल दबिश देनी पड़ी।
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