बरेली। हरुनगला में टेलीकॉम कंपनी का पोल लगाते वक्त हाईटेंशन लाइन के करंट से झुलसे 20 वर्षीय मजदूर हरिओम की बृहस्पतिवार सुबह मौत हो गई। गरीबी की वजह से हरिओम के घरवाले अधूरा इलाज कराकर ही उसे घर ले गए थे। बृहस्पतिवार तड़के हालत बिगड़ी तो वे उसे अस्पताल लेकर भागे मगर उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस घटना में तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी।ह हरिओम के पिता ने आरोप लगाया है कि टेलीकॉम कंपनी ने उसके इलाज का पूरा खर्च उठाने का वादा किया था लेकिन कुछ ही दिन बाद खर्च देना बंद कर दिया।
बदायूं के सिगोई निवासी हरिओम अपने रिश्तेदारों के साथ हरुनगला की क्रिस्टल कॉलोनी में एक टेलीकॉम कंपनी के पोल लगाने का काम कर रहे थे। 29 जनवरी को अचानक ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन लाइन में पोल टकराने से हादसा हो गया था। हादसे में सुभाष, उदयवीर और अनूप की मौके पर ही मौत हो गई थी। हरिओम और एक अन्य मजदूर को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां से कंपनी के खर्च पर उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। हरिओम के पिता धर्मपाल ने बताया कि कंपनी वालों ने दो निजी अस्पतालों में इलाज पर करीब 1.60 लाख रुपये खर्च किया था। वहां सुधार न होने पर परिजनों ने भोजीपुरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बताया कि यहां लाने के बाद कंपनी वालों ने इलाज का खर्च देना बंद कर दिया। सोमवार को आने को कह रहे थे पर आए नहीं। रुपयों का इंतजाम करके शनिवार तक काम चलाया। इसके बाद भूखे मरने की नौबत आई तो हरिओम को घर ले गए। यहां बृहस्पतिवार तड़के ही उसके कटे हाथ में खून का रिसाव शुरू हो गया। अस्पताल लेकर भागे तो उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। हरिओम की मौत की सूचना कंपनी वालों को दी तो उन्होंने शनिवार को आने को कहकर बात टाल दी।
मकान-जेवर गिरवी रखकर करा रहे थे इलाज
हरिओम के इलाज को जब कंपनी ने परिवार का साथ छोड़ा तो उन्हें परिवार की महिलाओं के जेवर समेत मकान तक गिरवी रखना पड़ा गया। पिता धर्मपाल ने बताया कि 40 हजार में जेवर पहले ही गिरवी रख दिए थे। जरूरत पड़ने पर मकान गिरवी दिखाकर भी 20 हजार रुपये लिए। कई रिश्तेदारों से भी रुपया उधार ले चुके थे।