बरेली। ‘जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी है’ यह नारा तो कई साल पहले किसी और सरकार में गूंजा था, लेकिन इसका असर योगी सरकार में भी दिख रहा है। उधर, सरकारी सिस्टम का यह हाल है कि सेंट्रल जेल की जमीन कब्जाकर बेच देने के मामले में एफआईआर कराने में ही उसे डेढ़ साल का वक्त लग गया। बृहस्पतिवार को एसएसपी के आदेश पर सेंट्रल जेल के पर्यवेक्षक की ओर से दर्ज हुई इस एफआईआर में आदर्श सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष और आठ सदस्यों को नामजद किया गया है।
गांव उदयपुर खास में सेंट्रल जेल की जमीन पर कब्जा करने और अवैध निर्माण कराने के मामले में पिछले साल जनवरी में डीएम से शिकायत की गई थी। डीएम के आदेश पर तहसीलदार सदर के नेतृत्व में राजस्व निरीक्षक रिठौरा ने सेंट्रल जेल की जमीन गाटा नंबर 28, 34, 35, 37, 38, 39 और 40 की पैमाइश कर मार्च में रिपोर्ट सौंपी। इसके मुताबिक गाटा नंबर 36 में आदर्श सहकारी समिति ने अवैध कब्जा कर निर्माण कराया और बैनामा कर उसे बेच भी दिया। डीएम के आदेश पर जांच होने के बाद एसडीएम सदर के आदेश पर तहसीलदार सदर ने दोबारा जांच की और दिसंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में भी सेंट्रल जेल की जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि की गई। इसके बाद अतिक्रमणकारियों से कब्जा छोड़ने को कहा गया तो उन्होंने उसके बैनामे दिखा दिए। इसके बाद सेंट्रल के कृषि पर्यवेक्षक अनिल कुमार कन्नौजिया ने एसएसपी को पत्र लिखकर आदर्श सहकारी समिति के अध्यक्ष सत्यप्रकाश शर्मा और उसके नौ सदस्य जगतपाल, मुनीश कुमार, गुरुदेव सिंह, वीरपाल, विमला देवी, मोहसिन रजा खां, सर्वेश गंगवार और संजय सिंह के खिलाफ सरकारी जमीन पर कब्जा करने और उसे धोखाधड़ी कर बेचने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। इंस्पेक्टर केके वर्मा ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।