लखीमुपर खीरी। जिले में टीबी का वार जारी है। इसका खुलासा जिला क्षय रोग विभाग की ओर से 10 से 19 जून तक चलाए गए घर-घर टीबी रोगी खोजी अभियान से हुआ। इस दौरान लक्षण के आधार पर जब 3925 लोगों का परीक्षण किया गया तो उसमें से 214 लोग टीबी रोग से पीड़ित मिले। ये ऐसे लोग थे जिन्हें टीबी रोग होने की जानकारी तक नहीं थी। 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त करने के लिए जिला क्षय रोग विभाग की ओर से टीबी रोगी खोजी अभियान चलाया गया। इस दौरान गठित टीमों ने 10 से 19 जून तक घर-घर जाकर जब लक्षण के आधार पर 5,32,248 लोगों का परीक्षण किया तो उसमें से 3925 लोग संभावित पीड़ित मिले। इनका परीक्षण किए जाने पर 214 लोगों में टीबी रोग की पुष्टि हुई। जिनका इलाज शुरू कर दिया गया है।
2018 में ही मिले टीबी रोगी- 7769
लक्षण
दो सप्ताह तक लगातार खांसी आना
बुखार बना रहना
भूख न लगना
निरंतर वजन का कम होना
ऐसे करें बचाव
टीबी के लक्षण लगने पर तुरंत जांच कराएं।
सरकारी अस्पताल में जांच एवं इलाज पूरी तरह से मुफ्त है।
यदि टीबी रोग से ग्रसित हैं तो खांसते एवं छींकते समय मुंह पर रुमाल रख लें।
बलगम थूकने के बाद उसे ढ़क अवश्य दें।
क्या है टीबी
ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी एक संक्रामक रोग है, जो माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु से होता है। ये सीधे फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन शरीर के अन्य भागों को प्रभावित कर सकता है। ये हवा के माध्यम से फैलता है। टीबी ग्रसित व्यक्ति के बोलने, खांसने एवं छींकने पर इसका जीवाणु हवा के माध्यम से दूसरों को संक्रमित कर देता है। इसका इलाज संभव है छह से नौ माह तक दवाओं को खाकर इससे छुटकारा पाया जा सकता है।
......एक मरीज 10 से 15 लोगों को बनाता है शिकार
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि टीबी का यदि एक मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 15 लोगों को इसका शिकार बनाता है। सबसे भयावह स्थिति तब होती है जब पीड़ित को मालूम ही न हो कि उसे टीबी रोग है। ऐसे पीड़ित व्यक्ति के खांसने, छींकने एवं बलगम आदि थूकने से टीबी के कीटाणु हवा के संपर्क में आकर आस पास के लोगों को भी इस रोग से ग्रसित कर देते हैं। इसलिए संभावित लक्षण प्रतीत होने पर जिला क्षय रोग अस्पताल आकर जांच अवश्य कराएं। जांच और इलाज नि:शुल्क है।.......
टीबी मुक्त इंडिया के लिए टीबी रोगियों को खोजने के लिए चलाए गए अभियान में 214 लोग टीबी प्रभावित मिले। इनका इलाज शुरू कर दिया गया है, जिससे इन्हें इस रोग से मुक्त किया जा सके।
डॉ. बलबीर सिंह,
जिला क्षय रोग अधिकारी