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दीपक की कस्टडी डेथ में अब तत्कालीन इंस्पेक्टर भी घिरे

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बरेली। लोको पायलट भगवानदास के बेटे दीपक यादव की कोतवाली पुलिस की हिरासत में हुई मौत के मामले में आरोपी तत्कालीन कोतवाल वीरेंद्र सिंह यादव और सिपाही रूम सिंह और मुकेश गिरि की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक दोबारा शुरू हुई सीबीसीआईडी जांच में तीनों के खिलाफ सबूत मिले हैं और सीबीसीआईडी जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
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सिविल लाइंस की डॉक्टर्स कॉलोनी में 27 सितंबर 2012 की शाम को बाइक सवार युवक ने एक महिला रजनी की गले से चेन खींच ली थी। इस दौरान रजनी ने धक्का देकर एक युवक को सड़क पर गिरा दिया जिसके बाद वह अपनी बाइक छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस की छानबीन में यह बाइक नार्थ रेलवे कॉलोनी निवासी राजीव यादव की निकली। 28 सितंबर को पुलिस ने राजीव के साथ उसके छोटे भाई दीपक को पूछताछ के लिए बुलाया। बाद में राजीव को तो छोड़ दिया मगर दीपक को हिरासत में ले लिया। आरोप है कोतवाली में दीपक की पिटाई के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। रात में जिला अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।
दीपक के घरवालों ने तत्कालीन इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह, सिपाही मुकेश गिरि और रूम सिंह पर उसकी हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया था। पिता भगवानदास की ओर से तीनों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई। शुरुआत में विवेचना तत्कालीन किला इंस्पेक्टर मो. बाबर को दी गई। कोतवाल वीरेंद्र सिंह यादव और दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया लेकिन बाद में तीनों बहाल हो गए। अब वीरेंद्र सिंह सीओ के पद से रिटायर हो चुके हैं। सिपाही रूम सिंह और मुकेश गिरि पीलीभीत में तैनात बताए जाते हैं।
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इंस्पेक्टर को बचाया तो दोबारा कराई जांच
10 अक्तूबर 2013 को दीपक की मौत की जांच सीबीसीआईडी को ट्रांसफर हो गई। सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर राकेश पांडेय ने विवेचना में वीरेंद्र सिंह यादव को निर्दोष और सिपाही रूम सिंह और मुकेश गिरि को दोषी माना। इस पर भगवानदास ने डीजीपी से शिकायत कर दोबारा विवेचना की मांग की। डीजीपी के निर्देश पर सीबीसीआईडी ने दोबारा विवेचना शुरू की। विवेचक इंस्पेक्टर शिवराज सिंह ने विवेचना पूरी करने के बाद मुख्यालय भेज दी थी। सूत्रों के मुताबिक इसमें कोतवाल वीरेंद्र सिंह के खिलाफ भी सबूत मिले हैं। चार्जशीट लगने से पहले वीरेंद्र सिंह ने डीजीपी के सामने अपना पक्ष रखा। इसे भी विवेचना में शामिल कर लिया गया है। बता दें कि दीपक की मौत की मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी जिसमें इंस्पेक्टर और दोनों सिपाही दोषी ठहराए गए थे। मजिस्ट्रेटी जांच को भी विवेचना में शामिल किया गया है।
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