बरेली। प्लॉट, मकान या दुकान के मालिकाना हक को लेकर विवाद तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन प्रेमनगर थाने में खड़ी एक रेंजर साइकिल इन दिनों दो परिवारों के बीच विवाद का कारण बनी हुई है। दो बच्चों से शुरू हुई ये कहानी दोनों के परिवारों तक जा पहुंची। रविवार को दोनों परिवारों के मुखिया सबूत के साथ थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस असमंजस में है कि साइकिल आखिर किसकी है... आठवीं के उदय की या नौवीं के स्टूडेंट प्रियांशु की।
रविवार दोपहर प्रेमनगर थाने में भीड़ लगी थी। जोशीटोला निवासी शशि देवी अपने बेटे उदय को लेकर यहां आई थीं तो जाटवपुरा के नगर निगम कर्मचारी सुशील अपने बेटे प्रियांशु और परिवार लेकर खड़े थे। बीच में थाने का एक सिपाही एक रेंजर साइकिल लिए खड़ा था। विवाद की जड़ इस साइकिल पर दोनों पक्ष अपना दावा जता रहे थे। शशि देवी ने बताया कि उनके पति अब नहीं रहे। बेटे की परवरिश खुद करती हैं। इसी 26 अप्रैल को टाउनहॉल के रावलपिंडी साइकिल स्टोर से बेटे को 4500 रुपये में ये साइकिल दिलाई है। छुट्टी के दिनों में बेटा मूर्ति चौराहे के पास ऑटो पार्ट्स की दुकान पर काम सीखने गया था। वहीं से किसी ने साइकिल चोरी कर ली। तब से वो इसे खोज रहा था। शनिवार को एक लड़का साइकिल ले जाते दिखा तो उदय ने घर तक पीछा किया। इसके बाद शिकायत पर पुलिस ये साइकिल थाने ले आई। वहीं, सुशील का कहना था कि उन्होंने नौ अप्रैल को अंकित ट्रेडर्स के यहां से साइकिल खरीदी। रसीद दिखाते हुए सुशील बोले कि नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे प्रियांशु के लिए उन्होंने 3750 रुपये मे ये साइकिल खरीदी है। इस रसीद को देख पुलिस गफलत में है, क्योंकि न्यूनतम चार हजार कीमत की साइकिल इससे कम में कैसे बेच दी गई। इंस्पेक्टर बलवीर सिंह बग्गा के निर्देश पर पुलिस ने दोनों दुकानों पर जाकर जांच की। दोनों दुकानदारों का भी ये कहना है कि साइकिल यहीं से खरीदी गई। हालांकि रसीद पर साइकिल का चेसिस नंबर न होने से जांच अटक गई है रावलपिंडी स्टोर वालों का कहना है कि थोक में वे अंकित ट्रेडर्स से ही माल खरीदते हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि पूरी तस्दीक के बाद सही स्टूडेंट को साइकिल दी जाएगी, दूसरे पक्ष पर कार्रवाई हो सकती है।