बरेली। हिस्ट्रीशीटर पाताराम की हत्या के मामले में कैंट पुलिस ने दो आरोपी जट्टा और बंटू के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। बाकी चार आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया। तर्क है कि पुराने मारपीट के मामलों से दोनों गुस्से में थे, नशे की हालत में बहस के बाद उन्होंने पाताराम को मार दिया।
इंस्पेक्टर कैंट अशोक पाल इस हत्याकांड की विवेचना कर रहे थे। इस मामले में उन्होंने दोनों मुख्य आरोपी छात्र जट्टा और बंटू को ही आरोपी मानते हुए आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है। 18 जनवरी की शाम पांच बजे पाताराम की हत्या कैंट की सद्भावना कॉलोनी में गोलियों से भूनकर की गई थी। तब पाताराम के भाई यादराम ने जट्टा, बंटू, हिम्मत सिंह, बंटी और खनन कारोबार से जुड़े रक्षपाल व नवल के नाम रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने हिम्मत सिंह और बंटी के नाम तो शुरू में ही निकाल दिए। बाद में बाकी दोनों आरोपियों को भी बाहर कर दिया। पुलिस की विवेचना के मुताबिक हिम्मत सिंह पाताराम का रिश्तेदार था। उस दिन पाताराम हिम्मत सिंह के घर बैठा हुआ था। यहीं पर जट्टा और बंटू आ गए, जिन्हें पाताराम पहले सार्वजनिक रूप से पीट चुका था। मोहल्ले में दोनों नए बदमाश के रूप में उभर रहे थे लेकिन किसी भी झगड़े के दौरान लोग उन्हें पाताराम को बुलाने की बात कहकर चिढ़ाते थे। इससे वे काफी खीझे हुए थे। बातों ही बातों में उन्होंने तमंचा निकालकर पाताराम को एक गोली मारी जो उसके हाथ पर लगी। पाताराम पहले समझ नहीं पाया कि लड़के उसे मार डालेंगे पर जब वे तमंचा दोबारा लोड करने लगे तो वह छत के रास्ते भागा। कई घरों की छत पर होते हुए, वह उस खाली मकान में कूदा, जहां उसकी हत्या हुई थी। पीछे से ये दोनों भी आए और मोबाइल पर भाई भतीजों को कॉल करते पाताराम को कई गोलियां मारकर हत्या कर दी। बताया कि बाकी आरोपियों की इस घटना में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।