बरेली। सीने पर पहली गोली लगने के बाद हिस्ट्रीशीटर पाताराम ने मदद के लिए भतीजे देवेंद्र को फोन किया था, लेकिन संजय दयाल के घर में कूदने के दौरान मोबाइल गिर गया। देवेंद्र गोलियों की आवाज सुनता रहा, लेकिन उसके पहुंचने से पहले बदमाश हत्या करके फरार हो चुके थे।
पुलिस की अब तक की छानबीन में सामने आया है कि हिम्मत सिंह के साथ पाताराम की अच्छी बनती थी। प्रापर्टी की बातचीत के लिए हिम्मत सिंह ने शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे पाताराम को बुलाया था। दोनों उसके घर के बाहर वाले कमरे में थे। पाताराम की स्कार्पियो दो घर छोड़कर दुकानों के पास खड़ी थी। इसी तरफ से बंटू, जट्टा समेत तीन-चार बदमाश आए थे। पड़ोसियों से बातचीत के आधार पर इंस्पेक्टर देवेंद्र ने बताया कि पहली गोली हवा में चलाई गई। हिम्मत सिंह के घर के दरवाजे से पाताराम बाहर झांका तो उसके सीने में पहली गोली मारी गई। यहां दरवाजे पर पुलिस को खून भी पड़ा मिला था।
इसके बाद जान बचाने के लिए वह घायल अवस्था में दरवाजे को अंदर से बंद करके सीढ़ियों से छत के रास्ते पड़ोस में संजय दयाल के घर में कूदा। इस दौरान पाताराम ने अपने भतीजे देवेंद्र को फोन करके मदद मांगी लेकिन कूदने के चक्कर में मोबाइल वहीं गिर गया था। देवेंद्र फोन पर गोलियों की आवाज सुनता रहा था। बदमाश हिम्मत सिंह के घर में घुसने के बाद छत तक आए, लेकिन पाताराम को नहीं ढूंढ सके। बाद में नीचे उतरकर संजय दयाल के घर का दरवाजे तोड़कर अंदर जाकर उसके सीने में दो गोलियां और मार र्दीं। पाताराम के नीचे गिरने के बाद उसके सिर पर गोली मारी गई।
कॉल डिटेल की मदद से दोस्तों को उठाया
पुलिस ने कॉल डिटेल की मदद से जट्टा के मददगार दो दोस्तों को थाने में बैठाया है। वारदात वाले दिन इनमें से एक ने एरिया की एक दुकान से दस हजार रुपये ले जाकर जट्टा का दिए थे। फिर इसी को एटीएम कार्ड का नंबर भेजकर जट्टा खाते में रुपये जमा कराने का दबाव बना रहा था।