भाई के कथित हत्यारों को सजा न मिलने से मायूस होकर चाहबाई के होम्योपैथी डॉक्टर रविंद्र सक्सेना के आत्महत्या करने के बाद पुलिस के आला अधिकारी हरकत में आ गए हैं। आईजी ध्रुवकांत ठाकुर ने रविंद्र के भाई मोहित की मौत की फाइल तलब कर ली है। उन्होंने क्राइम ब्रांच के विवेचक श्रीकांत को जांच पूरी करने के लिए टारगेट सेट करने के निर्देश जारी कर मोहित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे साक्ष्यों को दोबारा जांचने को कहा है। उधर, एसएसपी कलानिधि नैथानी ने भी तत्कालीन विवेचक के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश जारी किए हैं। यह जांच एसपी क्राइम रमेश भारतीय को सौंपी गई है।
चाहबाई में डाक्टर रविंद्र सक्सेना तीन साल से पहले छोटे भाई मोहित सक्सेना उर्फ मोनू के ‘हत्यारों’ को सजा दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पहले थाने में लंबे समय तक उनकी सुनवाई नहीं हुई, कोर्ट के जरिये उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन तत्कालीन इंस्पेक्टर देवेश सिंह ने जांच को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने क्राइम ब्रांच में विवेचना ट्रांसफर कराई तो यहां केस डायरी में ही खेल हो गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर के लक्षण मिलने पर विसरा सुरक्षित किया गया था। विसरा में जहर की पुष्टि होने के बाद क्राइम ब्रांच ने किला नदी के जहरीले पानी को मौत की वजह बताया, हालांकि पानी की जांच कराई गई तो यह दावा निराधार निकला। पुलिस की मनमानी से हारकर डॉक्टर ने रविवार सुबह 10 बजे फंदे पर लटककर खुदकुशी कर ली। अमर उजाला में प्रमुखता से यह खबर छपने के बाद दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं।
यह है पूरा मामला
डॉ. रविंद्र सक्सेना के छोटे भाई मोहित को उसके दोस्त अभिषेक सक्सेना, अश्वनी उर्फ आशू, टिंकू, भूरा उर्फ विक्की, मोहित राय और सैफी 26 फरवरी, 2015 को साथ लेकर समाधि की गौंटिया में नदी किनारे गए थे। इसके बाद मोहित गायब हो गया। सुबह उसकी लाश किला नदी में उतराती हुई मिली थी। आरोप था कि जुए के रुपयों के विवाद में दोस्तों ने ही उसकी हत्या कर दी और लाश को नदी में फेंक दिया।