एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में नर्स ने दुपट्टे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस को मौके से उसका सुसाइड नोट में मिला है जिसमें टीबी की बीमारी को आत्महत्या की वजह बताया गया है, हालांकि इस बात पर दुख भी जताया है कि इतने बड़े मेडिकल कॉलेज में नौकरी करने के बावजूद उसे टीबी के इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया।
पिथौरागढ़ के थाना गुरुमा के गांव शेरीकांडा निवासी विशन सिंह की 25 वर्षीय बेटी लक्ष्मी मेहता का शव बुधवार दोपहर तीन बजे आकांक्षा नाम की नर्स ने हॉस्टल के कमरे में लटका देखा। आकांक्षा की सूचना पर वार्डन शीला ने भोजीपुरा पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, लेकिन दरवाजे के ऊपर लगी खिड़की का शीशा टूटा हुआ था। पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी। लक्ष्मी का शव पंखे से लटका हुआ था और उसके पैर बेड पर टिके हुए थे। लक्ष्मी ने वर्ष 2011 में इसी मेडिकल कॉलेज में जीएनएम की पढ़ाई की थी। वर्ष 2015 में उनकी मेडिकल कॉलेज में ही नौकरी लग गई। लक्ष्मी की मौत पर उनके परिजनों ने कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े करते हुए थाने में हंगामा किया, लेकिन उनके पिता के आने का इंतजार करने की बात कहते हुए कोई तहरीर नहीं दी। लक्ष्मी के पिता बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर हैं। इधर, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि लक्ष्मी नौकरी के साथ-साथ बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई भी कर रही थी। 20 जुलाई से वह एक महीने की छुट्टी पर थी।
मेडिकल कॉलेज में नर्स ने फांसी लगाकर खुदकुशी की है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। नर्स का सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें उसने अपनी बीमारी और इतने बड़े संस्थान में काम करने के बावजूद इलाज के लिए जिला अस्पताल जाने की मजबूरी से परेशान होने की बात लिखी है। - डॉ. सतीश कुमार, एसपी देहात