बरेली। हिस्ट्रीशीटर पाताराम के हत्या आरोपी जट्टा और बंटू भी खनन का धंधा कर कमाई करने की फिराक में थे, लेकिन पाताराम उनके मंसूबे पूरे नहीं होने दे रहा था। वह अकेले ही यह काम करना चाहता था। इसलिए दोनों ने उसे ठिकाने लगा दिया।
शुक्रवार सुबह दस बजे पुलिस जट्टा और बंटू को रिमांड पर लेकर जेल से कैंट थाने लाई। पूछताछ में दोनों स्वीकार किया कि उन्होंने ही पाताराम को गोलियां मारी थीं। बताया कि दो साल पहले झगड़े में पाताराम ने उन्हें पीटा था। तबसे वह उससे रंजिश मानते थे। बीच में कई बार सुलह और कई बार छोटे विवाद हुए। वह लोग भी खनन के धंधे से कमाई करना चाहते थे, लेकिन पाताराम अकेला ही यह काम कर रहा था। तब उन्होंने उसे रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। कैंट इंस्पेक्टर अशोक कुमार पूछताछ के बाद दोनों को घटनास्थल पर ले गए। जहां पाताराम की हत्या की गई थी। इंस्पेक्टर के मुताबिक आरोपियों की निशानदेही पर बुखारा के जंगल में छुपाई गई पाताराम से लूटी गई स्कॉर्पियो, हत्या में प्रयुक्त 315 बोर के दो तमंचे और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। फिलहाल आरोपियों ने अपने किसी और साथी का नाम नहीं लिया है। कहा कि दूसरे आरोपियों की भूमिका को लेकर तफ्तीश जारी है। देर शाम पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें फिर जेल भेज दिया गया। बता दें कि गिरफ्तारी से पहले ही जट्टा और बंटू ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।