जनकपुरी कॉलोनी के कपड़ा व्यापारी के बेटे ने अपने अपहरण की झूठी सूचना देकर बुधवार रात पुलिस को काफी देर तक चिकरघिन्नी बनाया। बच्चे की शरारत को परिवार वाले भी नहीं समझ सके। प्रेमनगर पुलिस ने दो घंटे की जांच-पड़ताल के बाद वारदात को फर्जी करार दिया। इंस्पेक्टर बलवीर के मुताबिक, हकीकत सामने आने के बाद कोई लिखा-पढ़ी नहीं की गई।
जनकपुरी कॉलोनी के गारमेंट्स व्यापारी दीपाकंर अरोड़ा का ग्यारह वर्षीय बेटा वंश राजस्थान की वनस्थली विद्यापीठ में कक्षा सात में पढ़ता है। बुधवार रात नौ बजे परिवार की ओर से पुलिस को वंश के अपहरण की सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची तो बताया कि वैन सवार नकाबपोश बदमाशों ने वंश का अपहरण किया था। बदमाशों को जब यह पता चला कि उन्होंने गलत बच्चे को उठा लिया है तो वंश को छोड़ दिया। वंश के मुताबिक, जब वह दूसरे घर पर जा रहा था तभी एक वैन उसके पास आकर रुकी। उसमें से उतरे तीन नकाबपोश बदमाशों ने उसे उठाकर वैन में डाल लिया। मनोहर भूषण कॉलेज को पास बदमाशों ने वैन बदल ली। उसमें पहले से दो बदमाश बैठे थे। उन्होंने नाम, पता पूछने के बाद कहा कि गलत बच्चे को उठा लिया है। इसके बाद उसे जीआरएम स्कूल के पास छोड़ दिया। पुलिस ने छानबीन की तो कहीं भी घटना की पुष्टि नहीं हुई। इंस्पेक्टर बलवीर के मुताबिक, रात करीब 11 बजे बच्चे ने सही बात बताई। वह राजस्थान के वनस्थली विद्यापीठ की डे-बोर्डिंग में नहीं पढ़ना चाहता था, इसलिए उसने अपहरण का ड्रामा किया।