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दलाल ने जाने कितनों को बना दिया विकलांग

Thu, 28 May 2015 02:14 AM IST
बरेली
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 नवाबगंज के बिजौरिया गांव के  दलाल चरनजीत सिंह ने  कई लोगों के फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र बना कर बेच दिए। इसमें बाकायदा सीएमओ कार्यालय की मुहर लगी होती है और डॉक्टराें के हस्ताक्षर हैं। ये फर्जी विकलांग ट्रेनों और रोडवेज बसों में मुफ्त सफर करनेे के साथ तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। बुधवार को इनमें से एक फर्जी विकलांग नवाबगंज इलाके के ग्राम ईद जागीर गांव के 45 वर्षीय रामप्रताप को एसीएमओ डॉ. मातादीन ने पकड़ लिया और कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया। बकौल रामप्रताप उसकी जानकारी में ऐसे विकलांगों की संख्या 300 के करीब है। पुलिस ने सीएमओ की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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बुधवार दोपहर दो बजे रामप्रताप ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर रेलवे में आरक्षण प्राप्त करने के लिए फार्म भरा और उसे डॉक्टर से प्रमाणित कराने के लिए दिया। शक होने पर संबंधित बाबू कमल बहादुर सिंह ने पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने चरनजीत सिंह को छह सौ रुपये देकर विकलांग प्रमाण पत्र बनवाया है। उसने बताया कि कुष्ठ रोग की वजह से उसके हाथों में दिक्कत थी। शक होने पर बाबू अपने साथियों के साथ रामप्रताप को पकड़कर एसीएमओ के पास ले गए। एसीएमओ ने रामप्रताप से विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने के बारे में पूछताछ की तो उसने बताया कि फीस भरने के बाद चरनजीत सिंह ने उसे घर पर ही प्रमाण पत्र दे दिया था। चरनजीत सिंह ने आसपास के गांवों में भी तमाम लोगों के विकलांग प्रमाण पत्र बनाए हैं। जिले के करीब तीन सौ लोगों का चरनजीत सिंह प्रमाण पत्र बना चुका है। एसीएमओ ने रामप्रताप को कोतवाली भिजवा दिया। प्रभारी निरीक्षक सुधीर पाल धामा ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाला कोई गिरोह काम कर रहा है। इस मामले की बारीकी से जांच करके आरोपियों को चिहिन्त करके कार्रवाई की जाएगी।

फोटो---
अब होगा सभी का सत्यापन
सीएमओ ऑफिस से बाबू कमल बहादुर सिंह का कहना है कि जिले के सभी प्रमाण पत्रों की छानबीन की जा रही है। सीएमओ ने जिले से सभी प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने को कहा है। रामप्रताप जैसे और भी कई लोगों के प्रमाण पत्र दलाल जारी कर देते हैं। ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराई जा रही है।  
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पेंशन के लिए बनाते फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र
बरेली। दलालों के जरिये बन रहे फर्जी विकलांग प्रमाणपत्रों का ज्यादातर इस्तेमाल विकलांग पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए किया जा रहा है। दरअसल पेंशन योजना के लिए लगाए जाने वाले विकलांग प्रमाणपत्रों का कोई सत्यापन नहीं कराया जाता है।  50 फीसदी विकलांगता का सर्टिफिकेट बनाकर लोग पेंशन योजना के लिए आवेदन कर देते हैं। असल में 50 फीसदी विकलांगता का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए डॉक्टराें का पैनल आवेदक का परीक्षण करता है। सीएमओ कार्यालय में हर  गुरुवार को विकलांग बोर्ड के माध्यम से विकलांग प्रमाण पत्र बनाए जाते है। यहां मिलने वाला निशुल्क फार्म भरकर पूरे शरीर का एक फोटो लगाना होता है। शरीर का जो हिस्सा विकलांग हो वहां का भी फोटो लगता है। इसके बाद संबंधित डॉक्टर परीक्षण करते हैं। 50 फीसदी से कम विकलांगता वाले लोगों के प्रमाण पत्र नहीं बनाए जाते हैं। यह प्रमाण पत्र बिल्कुल निशुल्क होते हैं।
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ऐसे पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
बरेली। बुधवार को रेलवे में आरक्षण के लिए सत्यापन कराने नवाबगंज के जिस फर्जी विकलांग रामप्रताप को एसीएमओ डॉ. मातादीन ने पकड़ा, उसके फर्जी प्रमाण पत्र पर सभी डॉक्टरों के एक ही जैसे हस्ताक्षर थे। यह प्रमाण पत्र वर्ष 2011 में सीएमओ डॉ. एसपी गौतम के फर्जी हस्ताक्षर से जारी किया गया है। इस पर मुहर भी लगी हुई है। रामप्रताप को 50 फीसदी विकलांग बताने वाले प्रमाणपत्र में बीमारी का नाम भी गलत दर्ज था। क्रमांक संख्या भी फर्जी लिखी गई थी।
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