हाफिजगंज। परिजन के भारी विरोध के बाद एसडीएम के नेतृत्व में ढाई माह बाद कब्र खोदकर सादिक का शव निकाला गया। शव निकलाने के लिए गांव के पांच लोगों को बुलाकर पंचायतनामा भरकर दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
थाना हाफिजगंज के गांव बढे़पुरा में दुष्कर्म के आरोपी सादिक उर्फ सोने की जेल से छूटने के बाद एक जुलाई को उसके घर में संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। परिजन ने गांव के चार लोगों पर पीटने के बाद गला दबाकर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि हुई थी, जबकि आरोपी करंट से मौत होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को गलत बताकर अधिकारियों से दोबारा शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराने की गुहार लगाई थी। जिस एडीएम सिटी ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए थे। शुक्रवार एसडीएम नवाबगंज, इंस्पेक्टर सुरेश पाल सिंह और नवाबगंज इंस्पेक्टर गौरव यादव के साथ पीएसी लेकर शव को कब्र से निकालने के लिए गांव पहुंचे तो मृतक के पिता फारूख विरोध करने लगे। पुलिस कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें समझाकर कब्रिस्तान लेकर गई। पीछे से रोती बिलखती मृतक की मां मोबीन भी पहुंच गई। शव निकालने का विरोध करते हुए कब्रिस्तान के गेट पर लेट गई। इसके बाद पुलिस ने परिजन के सहयोग से उन्हें उठवाकर घर पर पहुंचाया। इसके बाद कब्रिस्तान की वीडियोग्राफी कराकर शव एसडीएम की उपस्थिति में निकाला गया।
मां बोली- पुलिस मरने के बाद भी बेटे को चैन नहीं लेने दे रही
सादिक की मां मोबीन ने जब सुना की उसके पुत्र का शव कब्र से दोबारा निकाला जाएगा। तभी से उसके होश उड़ गए। जब पुलिस व प्रशासन की टीम गांव पहुंची तो उसका रो रोकर बुरा हाल था। वह कह रही कि जिंदा पर चेन से लोगों ने बैठने नहीं दिया पहले जेल में रहा और उसके बाद मार दिया और मरने के बाद कब्र में भी अब चैन से नहीं सोने दे रहे है।