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डीएम हुए सख्त तो डीपीआरओ ने अब एक और सचिव पर दर्ज कराई रिपोर्र्ट

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पीलीभीत। मनरेगा और प्रधानमंत्री आवासों में गड़बड़ी को लेकर डीपीआरओ ने निलंबित चल रहे सचिव राजा तोमर के खिलाफ शुक्रवार को गजरौला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इससे पहले रिटायर्ड सचिव राजवंदन मिश्रा के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। एक हफ्ते में दूसरी बड़ी कार्रवाई से विभाग के कुछ लोग सकते में हैं।
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डीएम की सख्ती के चलते डीपीआरओ को अब आरोपियों पर शिकंजा कसना पड़ रहा है। मरौरी ब्लाक की ग्राम पंचायत बिठौरा कलां समेत अन्य ग्राम पंचायतों में हुए लाखों के घोटाले की प्रारंभिक जांच के बाद राजा को करीब दो महीने पहले निलंबित कर दिया गया था और मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई थी। लेकिन राजा ने जांच टीम को संबंधित अभिलेख ही उपलब्ध नहीं कराए। जांच टीम ने इसकी कई बार डीपीआरओ से शिकायत भी की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मामला जब डीएम के संज्ञान में आया तो डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव ने शुक्रवार को रिपोर्ट दर्ज कराई।
इससे पहले पिछले दिनों विकास भवन स्थित डीपीआरओ कार्यालय में डीएम वैभव श्रीवास्तव ने करीब दो घंटे ग्राम पंचायतों से संबंधित फाइलों में प्रधानों और सचिवों के घोटालों के मामले खंगाले थे। जांच के दौरान डीएम ने आदेश के बाद भी आरोपियों से रिकवरी किए बिना ही सेटिंग कर उन्हें बहाल करने का खेल पकड़ा था। इसके बाद उनके निर्देश पर डीपीआरओ ने रिटायर्ड सचिव राजवंदन मिश्रा के खिलाफ करीब चार दिन पूर्व गजरौला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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योगी जी ! इन मामलों में भी है कार्रवाई का इंतजार
पीलीभीत। नौकरशाही सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त सिस्टम बनाने के दावों को पलीता लगा रही है। खासकर भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ अफसरों का नरम रवैया सरकार की साख पर बट्टा लगाने का काम कर रहा है। जिले में कई ऐसे मामले हैं जिनमें अफसरों के साथ कर्मचारियों पर आरोप भी सिद्ध हुए, लेकिन कार्रवाई की बात आई तो मामले अभिलेखों में दफन कर दिए गए। इन मामलों में अफसर बड़े-बड़े दावे तो करते रहे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर नतीजा शून्य रहा।
केस-1
कूड़ेदान और सोलर लाइट घोटाला
ग्राम पंचायतों में सोलर लाइट और कूड़ेदान खरीद के नाम पर लाखों का घोटाला हुआ। कमीशनखोरी के चलते माधोटांडा रोड स्थित एक फर्जी एजेंसी स्वामी और उसके करीबी को ठेका दिया गया। खुले बाजार में 12 हजार में मिलने वाली सोलर लाइट 20 हजार की दर्शाकर गड़बड़ी की। इतना ही नहीं 1500 के कूड़ेदान का पांच गुना भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया। इसमें लाखों का खेल हुआ। जांच के नाम पर कमेटी भी गठित की गई, लेकिन जांच आज भी अधूरी है।
केस-2
करोड़ों की शत्रु संपत्ति कब्जाने वालों पर अफसर मेहरबान
डीएम आवास के बराबर करोड़ों की बेशकीमती शत्रु संपत्ति का रसूखदारों के नाम बैनामे होने के मामले को एक के बाद एक जांच के नाम पर उलझाए रखने की प्रशासन की ओर से कोशिश की जा रही है। यहां तक कि जिन रसूखदारों के नाम पर बैनामा किया गया अफसर उनके सिफारिशी तक बन गए हैं। रसूखदारों के दबाव में कार्रवाई न कर प्रशासन उनका कौन सा हित साधना चाहता है, यह समझ से परे है।
केस-3
दो करोड़ का घोटाला, कार्रवाई दो साल से अधूरी
हजारा में तैनाती के दौरान करीब दो करोड़ का घोटाला करने के आरोपी ग्राम पंचायत सचिव विवेक वर्मा के खिलाफ दो साल पूर्व हजारा थाने में मुकदमा दर्ज है। कार्यकाल के दौरान सचिव तीन से अधिक बार निलंबित हुआ लेकिन राजनीतिक दबाव में गुपचुप तरीके से बहाल करने का खेल चलता रहा। रिपोर्ट दर्ज होने के दो साल बाद भी अग्रिम कार्रवाई पेंडिंग है। जबकि सचिव को बर्खास्त करने का दावा किया गया था।
केस-4
डीएम को भी गुमराह कर गए अफसर
मरौरी की ग्राम पंचायत संडा में करीब पचास लाख के घोटाले में हर बार अलग-अलग आंकड़े पेश कर प्रकरण सुलझाने के बजाए डीडीओ उलझाते रहे। जांच में करीब तीन लाख का घोटाला सिद्ध होने पर डीएम ने 13 अगस्त को प्रधान पर कार्रवाई करते हुए सचिव को निलंबित करने का आदेश दिया। लेकिन डीएम को गुमराह कर एक नया आदेश बनाकर डीडीओ ने सचिव को निलंबित कर दिया। आदेश में घोटाले की राशि का जिक्र तक नहीं किया गया।
केस-5
कार्रवाई की नौबत आई तो शासन के पाले में डाल दी गेंद
सीएमओ कार्यालय में अस्पतालों के पंजीकरण और रिन्यूवल के नाम पर लंबे समय तक खेल चला। हकीकत परखने को डीएम पिछले दिनों जब सीएमओ कार्यालय पहुंचे तो चर्चित लिपिक भाग गया था। पूर्व और वर्तमान में पंजीकरण रिन्यूवल का पटल देखने वाले लिपिक पर सख्त कार्रवाई का दावा किया गया, लेकिन बाद में कार्रवाई की गेंद शासन के पाले में डाल दी गई।
केस-6
खतौनियां गायब होने के मामले में भी अब तक कार्रवाई नहीं
रसूखदारों के करोड़ों की शत्रु संपत्ति हथियाने के मामले में लेखपाल विकास वर्मा, राजस्व निरीक्षण ओमप्रकाश की जांच में रिकार्ड रूम में जमा बस्ते से 1367 फसली वर्ष के बाद फसली वर्ष 1380 की खतौनी उपलब्ध मिलीं, जबकि फसली वर्ष 1368 से लेकर फसली वर्ष 1379 तक की खतौनियां गायब थीं। मामला संज्ञान में आने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का दावा किया लेकिन अब तक इस मामले में न तो कोई कार्रवाई आगे बढ़ी है और न ही गायब खतौनियों का पता लगाया जा सका है।
केस-7
अफसरों का आदेश हवा में, सचिव मौज में
पूरनपुर की ग्राम पंचायत जोगराज में करीब 24 लाख का घोटाला हुआ। तत्कालीन अफसरों ने इसकी रिपोर्ट डीपीआरओ को सौंपी। सचिव विकास पांडे पर लगे आरोप ठीक मिलने पर कार्रवाई के दावा किए गए, लेकिन बाद में एक नई कमेटी गठित कर सचिव को बचाने के लिए फाइल अभिलेखों में दफन कर दी गई। करीब दो साल से मामला पेंडिंग पड़ा है।
हाल ही में स्वास्थ्य, शिक्षा समेत कई विभागों के कार्यालय का निरीक्षण किया गया था। जांच में खामियां मिलने पर तत्काल एक्शन लिए गए। डीपीआरओ कार्यालय में स्वयं प्रधानों और सचिवों से संबंधित फाइलों की हकीकत परखी थी। गड़बड़ी पर दो सचिवों पर एफआईआर कराई गई है। इसके अलावा अन्य विभागों के कर्मचारियों पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। सभी को सख्त हिदायत दी गई है।
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-वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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