शाहजहांपुर। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार ने हत्या एवं हत्या के प्रयास के मुकदमे में पांच सगे भाइयों समेत आठ मुजरिमों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार बंडा थाना क्षेत्र के गांव सिकरहनिया निवासी संतोष सिंह ने 21 मई 2010 को बंडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 20 मई की शाम वादी संतोष सिंह के गांव में रहने वाले निर्भान सिंह की बेटी की बारात पीलीभीत के पूरनपुर थानाक्षेत्र के गांव बलरामपुर से आई थी। निर्भान सिंह का मकान वादी के मकान से लगा हुआ है। द्वारचार के दौरान बारात में आए देवेश के नशे में होने की वजह से उसकी लाइसेंसी पिस्टल कहीं गिर गई थी। इसके बाद देवेश व उसके साथी बारातियों ने लाइन लगाकर ग्रामीणों की तलाशी ली और मारपीट की थी। वादी संतोष के पिता राम सिंह की भी तलाशी ली गई थी। वादी जब अपने मकान के पास खड़ा था तो उसे पकड़कर बाराती अपने गांव बलरामपुर ले गए। वहां ले जाकर उसे बुरी तरह मारा-पीटा था। रिश्तेदारों के बीचबचाव करने के बाद संतोष अपने घर लौट सके। इसके बाद 21 मई की सुबह करीब साढ़े पांच बजे जब वह अपने परिवार के साथ दरवाजे पर बैठे थे। तभी बंडा इलाके के खंडपारी निवासी तौलेराम अपनी लाइसेंसी रायफल, बलरामपुर निवासी हरनाम सिंह, उसका भाई सरनाम सिंह, देवेश, मायाप्रकाश, रामनिवास पुत्र रामस्वरूप और रामप्रताप अपनी लाइसेंसी रायफल व रक्षपाल पर अपने पिता की बंदूक लेकर जा पहुंचे। उन लोगों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू की। इससे वादी के भाई अजीत के सिर में गोली लग गई। फायरिंग में संतोष के पिता राम सिंह, छोटे भाई सुनील और सुनील के साले घायल हुए थे। अजीत की जिला अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। अदालत में मुकदमे के दौरान 11 गवाहों के बयानात एवं सरकारी वकील विनोद शुक्ल के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार को आरोपी तौलेराम सरनाम सिंह, रामप्रताप, देवेश, मायाप्रकाश, हरनाम सिंह, रामनिवास, रक्षपाल को दोषी पाया। सभी को आजीवन कारावास एवं 21500 रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है।