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‘पुलिस ने तो पागल बताकर छोड़ दिया.. दोबारा हमला नहीं करेगा, इसकी क्या गारंटी’

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‘पुलिस ने तो पागल बताकर छोड़ दिया.. दोबारा हमला नहीं करेगा, इसकी क्या गारंटी’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इंजीनियर ने बयां की पीड़ा, पुलिस की जवाबदेही तय करने का आग्रह
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बरेली। एक युवक के घर में घुसकर हमला करने से इंजीनियर और उनकी पत्नी की जान पर बन आई थी। बमुश्किल बारादरी पुलिस हमलावर को काबू में कर ले गई, लेकिन सुबह उसे पागल बताकर छोड़ दिया। इंजीनियर पुलिस के इस रवैये से काफी आहत हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में इसे सिस्टम का फाल्ट बताकर पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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राधेश्याम एनक्लेव निवासी इंजीनियर राजीव मोहन के घर शुक्रवार की रात जो हुआ उसे वह और उनकी पत्नी साधना भूल नहीं पा रही हैं। करीब साढ़े नौ बजे जब वह खाना खाने के बाद सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी किसी ने जोर से मेन गेट पीटा। उन्होंने गेट नहीं खोला तो एक युवक हाथ में लोहे का पाइप लेकर गेट फांदकर अंदर आ गया। पति-पत्नी ने खुद को कमरे में कैद कर लिया तो युवक ने गालीगलौज और धमकी देते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। सहमे इंजीनियर ने दोस्त राजीव सूरी और बारादरी पुलिस को सूचना दी। पुलिस रायफल से धमकाकर बाथरूम में घुसे हमलावर को काबू करके थाने ले गई, लेकिन शनिवार सुबह उसे यह कहकर छोड़ दिया कि वह पागल था। राजीव मोहन ने सीएम को भेजे पत्र में कहा है कि आश्चर्य की ही बात है जो पुलिस ने केवल 24 घंटे में ही हमलावर को कोई कार्रवाई किए बगैर छोड़ दिया। पुलिस जांच और कार्रवाई में मेहनत की बजाय आरोपियों को ऐसे ही छोड़ देती है। पुलिस की जवाबदेही तय की जानी चाहिए कि अगर अपराधी ने दोबारा पूरी तैयारी से आकर उनकी हत्या या लूटपाट की तो पुलिस का कोई नैतिक दायित्व होगा या नहीं। अगर हमलावर वाकई पागल था तो पुलिस ने उसे मानसिक अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया?
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