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मतलूब की मौत का मामला- तीन महीने बाद मिले अस्पतालों के जवाब से परिजन संतुष्ट नहीं

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बरेली। करीब तीन माह पहले आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी 59 वर्षीय मतलूब की इलाज के अभाव में मौत होने के मामले में चारों अस्पतालों ने अपना जवाब दे दिया है। उनके जवाब से परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। एस पर सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं।
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सितंबर में मोहल्ला भूड़ के रहने वाले मतलूब हुसैन की तबीयत बिगड़ी तो परिजन उन्हें लेकर एक के बाद एक चार निजी अस्पतालों में गए, लेकिन आयुष्मान कार्ड दिखाने के बाद भी किसी ने इलाज नहीं किया। इससे मतलूब की मौत हो गई। परिजन ने मामले में जांच की मांग की तो मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने चारों अस्पतालों से स्पष्टीकरण मांगा। स्पष्टीकरण देने में अस्पतालों को काफी वक्त लगा। उन्होंने जो जवाब दिया है, उस पर परिजन ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अस्पताल अपनी गर्दन बचाने के लिए झूठ बोल रहे हैं। इस पर सीएमओ ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। प्रभारी मंत्री के सामने परिजन ने दोबारा जांच की मांग की लेकिन वह अब तक जांच शुरू नहीं हुई है।
बेहतर कार्य के लिए सीएमओ हो चुके हैं सम्मानित
आयुष्मान योजना में बेहतर कार्य करने पर पिछले दिनों सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल को केंद्र सरकार ने सम्मानित किया है, लेकिन उन्हीं के जिले में आयुष्मान कार्ड लेकर इलाज के लिए मरीज भटक रहे हैं। कई मामले प्रकाश में आए लेकिन उनमें अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से अस्पताल संचालक भी बेखौफ हैं। सीएमओ के मुताबिक उन्होंने निजी अस्पतालों के इलाज न देने की शिकायत पर शासन से पूछा है कि ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की जा सकती है। अर्थदंड के अलावा विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है या नहीं।
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आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी इलाज न करने वाले अस्पतालों का जवाब आ गया है। परिजन ने इस जवाब पर आपत्ति जताई है। इस मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
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