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मयूर वन चेतना केंद्र के पास बस ने स्कूटी को रौंदा, दंपती की मौत

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बरेली। मयूर वन चेतना केंद्र के पास बन चुके एक्सीडेंट जोन ने अब शहर निवासी दंपती की जान ले ली। दंपती अपने रिश्तेदार को देखने बालाजी दरबार जा रहा था कि बजरी से फिसलकर स्कूटी सामने से तेज गति से आ रही रोडवेज बस के नीचे घुस गई। देर रात इज्जतनगर थाने में रोडवेज ड्राइवर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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शहर के जगतपुर निवासी 58 वर्षीय लोकेश मिश्रा अग्निशमन उपकरण की कंपनी में काम करते थे। उनके साले राजीव शर्मा ने बताया कि परिवार के ही एक युवक की तबीयत कई दिन से खराब थी। दवा से लाभ नहीं हुआ तो किसी ने बालाजी दरबार रिठौरा जाने की सलाह दी। तब परिवार के लोग उसे दरबार ले गए। लोकेश अपनी पत्नी 54 वर्षीय मीना देवी के साथ स्कूटी से युवक को देखने रिठौरा के दरबार जा रहे थे। मयूर वन चेतना केंद्र के पास निर्माण कार्य की वजह से बजरी डाल दी गई है। दंपती की स्कूटी इस बजरी पर फिसली तो अनियंत्रित हो गई और सामने से तेज गति से आती रोडवेज बस के पिछले पहिये के नीचे आ गई। इससे लोकेश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मीना देवी ने निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। देर रात लोकेश के भाई विकेश मिश्रा की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिवार में कोहराम मच गया है। दंपती की चार बेटियां हैं जिनमें से दो की शादी हो गई है।

नौ दिन पहले कपड़ा व्यापारी के बेटे की हुई थी मौत
मयूर वन चेतना केंद्र के पास ही 31 अक्तूबर की रात मॉडल टाउन के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारी गुरदीप सिंह के बेटे लवजोत की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। लवजोत अपने दोस्तों के साथ एक बर्थडे पार्टी में गया था। लौटते वक्त तेज रफ्तार कार में ब्रेक लगाए तो मोड़ पर वह अनियंत्रित होकर पलट गई। छह अन्य दोस्तों में तीन को गंभीर चोट आई।
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पूर्व मेयर के रिश्तेदार की भी यहीं गई थी जान
- पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के रिश्तेदार बिल्डर युवराज सिंह ने भी दो साल पहले इसी जगह दम तोड़ा था। उनकी कार का तेज गति से सामने से आती कार से एक्सीडेंट हो गया था। इस दौरान कार में युवराज सिंह की पत्नी और बेटी भी थे।

ब्लैक स्पॉट पर प्र्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
- मयूर वन चेतना केंद्र के पास बने ब्लैक स्पॉट पर प्रशासन ध्यान नहीं देता है। युवराज की मौत के बाद तत्कालीन कमिश्नर ने यहां ब्लैक स्पॉट खत्म करने को कार्ययोजना बनाई थी जो धरातल पर न आ सकी। लवजोत की मौत के बाद फिर कवायद का दावा किया जा रहा था, लेकिन सुधार होने से पहले ही दंपती की जान चली गई।
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