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यूथ की नसों में जहर घोल रहा सूखा नशा

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बरेली। अकेले हुक्का बार ही नई पीढ़ी को नशेड़ी नहीं बना रहे, सूखा नशा भी निम्न और मध्यम वर्ग के युवाओं के शरीर को खोखला कर रहा है। नशे की सनक में सुसाइड का तरीका देखकर खुद फंदा लगाने वाले अज्जू जैसे जाने कितने किशोर और नौजवान इस नशे के आदी हो चुके हैं। शहर के डीडीपुरम व अन्य पॉश इलाकों के पार्कों में शाम ढले ऐसे लोगों की गतिविधियां साफतौर पर देखी जा सकती हैं।
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व्हाइटनर व डाएल्यूटर मिलाकर सूखा नशा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें 14 से 24 साल के लोगों की तादात इसी तरह का नशा करने वाले कुल नशेड़ियों की सत्तर फीसदी तक पहुंच गई है। प्रेमनगर, इज्जत नगर और सुभाष नगर थाना क्षेत्र में इस तरह का नशा करने वाले किशोर बहुतायत में हैं। इनमें कुछ हमउम्र लड़कियां भी शामिल हैं। सामान्य परिवारों के ये लाड़ले अपने स्कूल या पॉकेट खर्च से रुपया बचाकर या घर परिवार की छोटी चोरियों से रुपये जुटाते हैं और इस तरह के नशे का जुगाड़ करते हैं। दिन में ये लोग अपने स्कूल या कार्यस्थलों पर ही नशा कर लेते हैं और शाम ढले टहलने के बहाने पार्कों और एकांत स्थानों पर आ जाते हैं।

कुतुबखाने की दुकानों पर मिलता है नशे का सामान
- जरी या अन्य तरीके की कसीदेकारी को चिपकाने के लिए एक केमिकल पेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। ये सौ से डेढ़ सौ रुपये तक में कुतुबखाना की दुकानों पर आसानी से मिल जाता है। इसे सूंघने से तीखा नशा होता है। आमतौर पर इसे वयस्कों को ही बेचा जाना चाहिए पर दुकानदार मुनाफे के चक्कर में इसे लड़कों को थमा देते हैं। थिनर व पंचर जोड़ने वाला सुलोचन भी इसी तरह का नशा करने के काम आता है। वहीं व्हाइटनर व डाएल्यूटर मिलाकर भी ये लोग सस्ता नशा करते हैं। इस तरह का नशा शराब से कई गुना खतरनाक है जो शरीर और दिमाग को सुन्न कर देता है।
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