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नशे में ट्रेन के आगे कूदे मजदूर की मौत, बचाने की कोशिश में बेटे का पैर कटा

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उझानी (बदायूं)। शराब के नशे में मामूली बात पर बेटे से झगड़ बैठे मजदूर ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। पिता को बचाने की कोशिश में बेटा भी ट्रेन की चपेट में आ गया। उसका एक पैर कट गया। घायलावस्था में वह पूरी रात लाइन किनारे पिता के शव के पास ही बेहोशी की हालत में पड़ा रहा। मार्निंग वॉक पर निकले लोगों ने शव के पास ही युवक को देखा तो पुलिस को बुला लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले घायल युवक को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया, फिर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया।
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घटना गुरुवार रात करीब 11 बजे रेलवे बदायूं छोर वाले आउटर के पास हुई। मृतक राधेलाल (55) शाहजहांपुर जिले में परौर थाना क्षेत्र के गांव ग्योड़ी खजुरी का मूल निवासी था। वह बेटे शेरा के साथ उझानी मेें बेलदारी का काम करता था। उसकी रिश्तेदारी कादरचौक के गांव ढढू का नगला में है, लेकिन वहां बहुत कम ही जाता था। रोज की तरह गुरुवार को बेलदारी काम करने के बाद राधे और उसका बेटा शेरा रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। राधे नशे की हालत में था। दोनों के बीच किसी बात पर स्टेशन पर ही कहासुनी हो गई तो राधे गुस्से में रेलवे लाइन पर होकर बसोमा की ओर चल पड़ा। पीछे-पीछे बेटा बी दौड़ा। आउटर के पास पहुंच कर बेटे ने उसे रोक लिया, लेकिन कासगंज की तरफ से ट्रेन को करीब आता देख राधेलाल उसके आगे कूूद गया। पिता को बचाने की कोशिश में उसका बेटा शेरा भी ट्रेन की चपेट में आ गया। इससे राधेलाल की तो मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका बेटा शेरा का भी एक पैर कट गया। घायलावस्था में शेरा पूरी रात पिता के शव के पास ही बेहोशी की हालत में पड़ा रहा। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों की नजर पड़ी तो उन्होंने घायल शेरा से घटना के बारे में जानकारी कर पुलिस को मौके पर बुला लिया। शेरा ने बताया कि ट्रेन के आगे कूदकर जान देने से पहले पिता ने उसके साथ हाथापाई भी की। पुलिस ने शेरा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। इधर, जीआरपी चौकी इंचार्ज संतोष कुमार ने बताया कि ढढू का नगला गांव से राधेलाल के रिश्ततेदार भी आ गए थे। पोस्टमार्टम कराके शव उनके हवाले कर दिया गया है।
राधे की चार संतान में दो की परवरिश करते हैं रिश्तेदार
उझानी। शाहजहांपुर जिले में परौर के गांव ग्योड़ी खजुरी निवासी राधेलाल मौर्य अपने दोनों भाइयों और पत्नी के निधन के बाद करीब पांच साल पहले ही पैतृक घर को छोड़ चुका था। उसकी चार संतान में तीन बेटे और एक बेटी हैं। बड़ा बेटा हीरालाल कहीं बाहर तो उससे छोटा शेरा पिता के साथ ही मेहनत-मजदूरी में लगा रहा। बेटी लक्ष्मी (13) ढढू का नगला गांव में राधे के भांजे के घर तो सबसे छोटा बेटा सत्यवीर उसके दूसरे बहनोई कुंवरपाल के घर रहता है।
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