बरेली। भाभी को जलाकर मारने के आरोप में परिवार के साथ आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी ने जिला जेल में अपनी बैरक के ऊपरी हिस्से में फंदा लगाकर जान दे दी। देर रात पुलिस प्रशासन के अफसरों ने जेल पहुंचकर शव उतरवाया। अफसरों ने इस मामले में जांच की बात कही है, वहीं परिवार वालों ने साजिश की आशंका जताई है।
बिहारीपुर कसगरान निवासी 52 वर्षीय शुजातुल्लाह उर्फ पप्पू अपने परिवार के चार लोगों के साथ जिला जेल में बंद था। शुक्रवार शाम करीब सात बजे पप्पू का शव बैरक के ऊपरी हिस्से में बंद दरवाजे के कुंडे में बनियान और अंडरवियर की इलास्टिक से बनी रस्सी से लटका था। शव का अधिकांश हिस्सा सीढ़ियों पर रखा था। बैरक में साथ सजा काट रहे छोटे भाई सलीम ने यह देखकर शोर मचाया तो बंदीरक्षक पहुंचे। जिला जेल अधीक्षक यूपी मिश्रा ने अधिकारियों को सूचना दी। सीओ थर्ड कुलदीप कुमार, तहसीलदार सदर, इंस्पेक्टर बिथरी ललित मोहन भी पहुंचे और शव को सील करके जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया।
पत्नी और दो भाई भी काट रहे थे सजा
जुलाई 2012 में पप्पू की भाभी शमशेर बेगम की घर में जलकर मौत हो गई थी। इन लोगों के बीच संपत्ति बंटवारे का विवाद था। शमशेर बेगम के भाई ने पप्पू, उनकी पत्नी हजरा, सौतेले भाई शिम्मी, सलीम और पप्पू की मां मुन्नी बेगम के खिलाफ रिपोर्ट कराई। दो साल पहले मुन्नी बेगम की मौत हो गई। मई 2018 में सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई और जेल भेज दिया गया। तब से ये जेल में बंद हैं।
जेल में ऐसा क्या हुआ जो खुदकुशी कर ली
बरेली। जिला जेल में कैदी की आत्महत्या ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। परिवार से लेकर पड़ोसी तक अवाक हैं कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो पप्पू ने जान दे दी। बेटे और भाई ने कई सवाल उठाए हैं, जिससे जिम्मेदारों का फंसना तय है।
अच्छे इलेक्ट्रिीशियन में शुमार रहे पप्पू के तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी हिना की शादी हो चुकी है। उससे छोटा बेटा शारुल मदरसे में पढ़ता है और उससेे छोटी 17 साल की बेटी फैजी है। हिना और उसका पति तालिब 12 दिन पहले ही पप्पू से मिलकर आए थे। तब वह बिल्कुल ठीक थे और अपनी पेरोल कराने को कहा था। कुछ दिन पहले शारुल ने भी पिता से मुलाकात की थी। बेटे, दामाद और पप्पू के बड़े भाई इशरत उल्ला खां का कहना है कि पप्पू खुदकुशी नहीं कर सकते। उनके साथ जरूर कुछ गलत हुआ, यह राज सामने आना चाहिए। सात बजे घटना होने के बावजूद उन लोगों को रात बारह बजे के बाद मौत से संबंधित चिट्ठी रिसीव कराई। आखिर पांच घंटे तक इसे क्यों छिपाए रखा गया।
जेल अधीक्षक बोले- भाई को भी साथ रखा था
पप्पू के परिवार के आरोपों से इतर जेल अधीक्षक का कहना है कि पप्पू ने उनके सामने पेश होकर कहा था कि उसे अकेले में अच्छा नहीं लगता। जब उसके परिवार के लोग यहां हैं तो उन्हें साथ में रहने दिया जाए। तब उसके एक भाई को उसकी बैरक में तो दूसरे को पड़ोस की बैरक में रखया गया। पत्नी महिलाओं की बैरक में रहती थी लेकिन इनकी मुलाकात अक्सर होती थी। जेल प्रशासन की ओर से कोई दिक्कत नहीं थी। जेल प्रशासन ने तत्काल ही पुलिस को परिवार को सूचित करने को कहा था, देर क्यों हुई इसकी जानकारी नहीं है।